झज्जर निवासी रामेश्वर ने हाईकोर्ट को बताया था कि 16 मई 1995 में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में उसे दोषी करार देकर तीन साल की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि याची ने 11 माह प्रोबेशन को पूरा किया और उसकी कोई शिकायत नहींं थी। वर्तमान में याची 75 वर्ष का है और ऐसे में उसे प्रोबेशन के उल्लंघन के लिए जेल भेजना ठीक नहीं है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रोबेशन के उल्लंघन पर बुजुर्ग को 3 साल के लिए जेल भेजने के आदेश को अत्यधिक अनुचित करार देते हुए इसे रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने याची को जुर्माने के तौर पर 50 रुपये जमा करवाने का आदेश दिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए झज्जर निवासी रामेश्वर ने हाईकोर्ट को बताया था कि 16 मई 1995 में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में उसे दोषी करार देकर तीन साल की सजा सुनाई गई थी।
सजा के खिलाफ याची ने अपील की थी और सेशन कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए उसे बरी कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और हाईकोर्ट ने मामला दोबारा ट्रायल कोर्ट को भेजते हुए निर्णय लेने का आदेश दिया था।
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2012 में ट्रायल कोर्ट ने याची को दोषी करार दिया था लेकिन तीन साल की सजा के स्थान पर एक साल प्रोबेशन तय किया था। इस अवधि में यदि उसके खिलाफ किसी अन्य अपराध में एफआईआर दर्ज होती तो उसे असल 3 साल की सजा पूरी करनी पड़ेगी। प्रोबेशन की अवधि पूरा होने में जब एक माह बाकी रहा तो याची के भाई ने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी और प्रोबेशन रद्द करने की मांग की। अदालत ने 2019 में इसे मंजूर करते हुए उसे तीन साल के लिए जेल भेजने का आदेश दे दिया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने कहा कि याची ने 11 माह प्रोबेशन को पूरा किया और उसकी कोई शिकायत नहींं थी। वर्तमान में याची 75 वर्ष का है और ऐसे में उसे प्रोबेशन के उल्लंघन के लिए जेल भेजना ठीक नहीं है। हाईकोर्ट ने याची ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए याची को प्रोबेशन के उल्लंघन पर 50 रुपये का जुर्माना लगाया है।