चंडीगढ़ पीजीआई के कोविड अस्पताल ने जहां देश के हजारों संक्रमित मरीजों की जान बचाई है, वहीं अस्पताल प्रशासन ने अपने स्वास्थ्यकर्मियों को तनावमुक्त रखने का भी पूरा प्रबंधन किया है। पीजीआई ने ऑडियो विजुअल रिमोट सर्विलांस डोपिंग सिस्टम के माध्यम से पीपीई किट पहनने व उतारने की तकनीक पर सर्वे किया। सर्वे में यह बात सामने आई है कि प्रबंधन के इस प्रयास से स्वास्थ्य कर्मी काफी हद तक संतुष्ट हैं। इसमें शामिल 75 प्रतिशत कर्मचारियों ने तकनीक के माध्यम से तनावमुक्त होकर काम करने की बात कही है।
सर्वे में शामिल एनेस्थीसिया विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अजय सिंह ने बताया कि पीजीआई ने कोरोना की पहली लहर के दौरान 2020 मई में अपने स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई किट पहनने(डोनिंग) और उतारने (डोफिंग) के दौरान किए जाने वाले 20 प्रक्रियाओं के बीच संक्रमित होने से बचाने के लिए ऑडियो विजुअल रिमोट सर्विलांस डोपिंग सिस्टम लागू किया था। यह देश का पहला ऐसा सिस्टम था जिसे पीजीआई ने सफलतापूर्वक लागू कर अपने स्वास्थ्य कर्मियों को संक्रमण से बचाया। इस तकनीक का प्रयोग कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों की मानसिक स्थिति और संतुष्टि का स्तर जांचने के लिए ही इसकी अगली कड़ी में सर्वे किया गया। साथ ही इस तकनीक की अगली कड़ी में वन में कम्युनिकेशन की बजाए टू वे कम्युनिकेशन की सुविधा शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि बताने वाले का सीधा संपर्क सीखने वाले के बीच हो सके।
- कोविड अस्पताल में बनाए गए क्षेत्र में उन्हें उनके जरूरत के अनुसार संक्रमण से बचाव संबंधी संसाधन प्राप्त है कि नहीं।
- पीपीई किट पहनने व उतारने के दौरान उनके द्वारा की जा रही गलतियों को सुधारने की व्यवस्था वहां है कि नहीं।
- ऑडियो वीडियो माध्यम के जरिए पीपीई किट पहनने व उतारने संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की सुविधा के बाद से संक्रमण को लेकर उनके मन से डर, एंजायटी व तनाव कितना दूर हो पाया है।
हमारा उद्देश्य मरीजों के साथ ही अपने स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा और मानसिक संतुष्टि का भी पूरा ध्यान रखना है। इसके अंतर्गत ही हमने सबसे पहले ऑडियो विजुअल माध्यम से पीपीई किट पहनने व उतारने की तकनीक लागू की, ताकि वे इस प्रक्रिया के दौरान संक्रमित न हो सके। उसके बाद उस तकनीक का प्रभाव जानने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों के बीच सर्वे किया जिससे पता चला कि हमारा किया गया कार्य उन्हें मानसिक रूप से संतुष्ट व तनाव मुक्त करने में सहायक सिद्ध हुआ है। -प्रो. जीडी पुरी, डीन एकेडमिक पीजीआई