सिंथेटिक रंगों से होली खेलना कई गंभीर बीमारियों को न्यौता देने जैसा है। इनसे ऐसे रोग भी हो सकते हैं जो उम्र भर पीछा न छोड़ें। फोर्टिस अस्पताल के एडिशनल डायरेक्टर डा. विकास भूटानी ने इस संबंध में खास एडवायजरी भी जारी की है।
गुलाल में जहरीले रसायन
डॉ. भूटानी के अनुसार गुलाल में कई नुकसानदेह तत्व होते हैं। इनमें लेड सबसे खतरनाक है। उससे नाड़ी तंत्र, किडनी, प्रजनन क्षमता, भ्रूण विकास आदि पर विपरीत असर पड़ता है।
गर्भवती महिलाएं रखें सावधानी
सिंथेटिक रंगों से होली खेलने से गर्भवती महिलाओं को विशेषरूप से बचना चाहिए। इससे गर्भपात और शिशु के मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है।
त्वचा की एलर्जी
इन रंगों के इस्तेमाल से त्वचा में एलर्जी, डरमेटाइटिस, खुष्की, स्किन कैंसर, अस्थमा, निमोनिया, मेटाबॉलिक डिसऑर्डर, नाड़ी तंत्र में गड़बड़ी आदि समस्याएं भी आ सकती हैं।
ऐसे बनाएं आर्गेनिक रंग
डाक्टर भूटानी ने बताया कि ऑर्गेनिक रंग सुरक्षित होते हैं और उन्हें आसानी से घर पर बनाया जा सकता है। हल्दी को आटे में मिलाकर सूख पीला रंग बना सकते हैं, अनार की पंखुड़ियों को उबालकर पीला, सेमुल/टेसू के फूलोें से नारंगी, हल्दी में लाइम मिलाकर गहरा लाल रंग और हिना में आटा मिलाकर मेहंदी जैसे रंग आसानी से तैयार हो जाते हैं।
सावधानियां
1. एक-दूसरे के संवेदनशील अंगों पर रंग नहीं डालें।
2. यदि रंग आंखों में गिर भी जाए तो उसे खूब पानी से धोएं और यदि फिर भी जलन कम न हो तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं
3.होली खेलने से पहले शरीर पर तेल नहीं लगाएं क्योंकि इससे रंग शरीर के अंदर जा सकते हैं
4. सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल नहीं करें, ऑर्गेनिक रंग लगाएं या घर पर तैयार रंगों से ही होली खेलें
5.बालों को रंगों से बचाने के लिए टोपी पहनें
6.दांतों को बचाने के लिए डेंटल कैप लगाएं
7.पूरी बाजू की टी-शर्ट या टांगों को पूरी तरह ढंकने वाली लैगिंग पहनें ताकि खतरनाक रंगों से आपका शरीर बचा रहे
8. मुंह पर संभावित हमले से बचें, ऐसे मामलों में अपना मुंह और आंखें बंद करके रखें
9. यदि घर से बाहर निकलना हो तो कार के शीशे खोले नहीं। बेहतर होगा कि होली पर बाहर नहीं निकलें, सूखे रंगों से ही होली खेलें