दो दिन पुराने बुखार पर यदि कोई डाक्टर आपको डेंगू के लक्षण बता रहा है तो डरने की जरूरत नहीं है। ट्राइसिटी में कुछ डाक्टर डेंगू की जांच के लिए रेपिड किट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह झटपट रिजल्ट बताता है, जबकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइंस के मुताबिक रेपिड किट की रिपोर्ट भरोसे लायक नहीं है। इसमें झूठी पॉजिटिव रिपोर्ट आने की संभावना ज्यादा रहती है, इसलिए सरकार ने आईजीएम एलाइजा किट की टेस्ट रिपोर्ट को मान्यता दी है।
गाइडलाइंस के मुताबिक पांच दिन बुखार रहने के बाद ही एलाइजा किट से जांच कराएं। सरकार ने पिछले साल इसके लिए सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पताल को एलैजा किट के इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था।
हालांकि अब भी कई डाक्टर रेपिड किट का प्रयोग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि दो दिन के बुखार में भी रेपिड किट डेंगू बताने लगता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि पांच दिन बुखार में आईजीएम एलैजा किट से जांच कराने पर वॉयरस के रिएक्शन स्तर को बताता है।
यह एक एंटीबॉडी जांच है और कंफर्म टेस्ट दिखलाता है। इन्हीं दलीलों की वजह से स्वास्थ्य मंत्रालय इस टेस्ट को बेहतर मानती है।
यहां से करवाएं डेंगू का टेस्ट
डेंगू के टेस्ट के लिए चंडीगढ़ में बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है। चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से सेक्टर-16 हास्पिटल, मनीमाजरा के हास्पिटल, जीएमसीएच-32 और पीजीआई में आईजीएम एलैजा किट की व्यवस्था की गई है। डाक्टरों का कहना है कि यह किट बाहर से मंगवाई जाती है। इसलिए जब पांच दिन तक बुखार रहे तभी इससे टेस्ट करवाएं। बेवजह इसकी बरबादी न करे।
883 संदिग्ध सैंपल, अब तक एक भी केस नहीं
चंडीगढ़ में डेंगू का अब तक एक भी केस सामने नहीं आया है। 31 जुलाई तक 883 संदिग्ध सैंपल लिए गए, लेकिन जांच परिणाम में कोई भी पॉजिटिव परिणाम नहीं आया। हालांकि डेंगू का सीजन शुरू होने वाला है। कुछ दिनों में इसका मच्छर एक्टिव हो सकता है। ऐसे में लोगों को सतर्कता बरतने की जरूरत है। बुखार के लक्षण मिलने पर पास की डिस्पेंसरी व अस्पताल में जरूर संपर्क करे।
कोट
डेंगू का अब तक कोई भी कंफर्म केस नहीं आया है। प्रशासन सिर्फ आईजीएम एलैजा किट किट की रिपोर्ट ही मानता है। चंडीगढ़ में चार जगह टेस्ट की व्यवस्था की गई है।
डा. अनिल गर्ग, असिस्टेंट डायरेक्टर मलेरिया