चंडीगढ़ के अस्पतालों में कोई सोता मिला तो कोई मोबाइल और गपशप में व्यस्त। चंडीगढ़ जैसे शहर में हैरान करने वाली यह स्थिति खुद स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने देखी। दरअसल, रविवार रात वह सरकारी अस्पतालों के औचक निरीक्षण पर निकले और जीएमसीएच-32 व जीएमएसएच-16 समेत छह अस्पतालों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जो देखा वह हैरान करने वाला था। किसी अस्पताल में डॉक्टर सो रहे थे तो कहीं शराब के पैग लगाए जा रहे थे। स्वास्थ्य सचिव ने किसी पर कार्रवाई नहीं की लेकिन चेतावनी दी कि आगे ऐसा हुआ तो माफी नहीं मिलेगी। भविष्य में भी वह ऐसे ही औचक निरीक्षण करते रहेंगे। उन्होंने एसएमओ, एमएस, डीएचएस व डीपी को भी इस तरह से जांच करने के निर्देश दिए हैं।
मनीमाजरा सिविल अस्पताल में बिना मास्क मिले कर्मचारी
स्थान: सिविल अस्पताल मनीमाजरा
दिन व समय : रविवार रात 11.20 से 11.35 बजे तक
स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग यहां एक सामान्य व्यक्ति के रूप में पहुंचे। देखा कि ज्यादातर चिकित्सा कर्मचारियों ने मास्क नहीं पहना है। हालांकि इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) डॉ. मोहम्मद अशरफ वार्ड में मौजूद थे और मरीजों को देख रहे थे। लेबर मेडिकल ऑफिसर (एलएमओ) डॉ. श्वेता भी वार्ड में ही थीं और डिलीवरी करा रही थीं। यहां उन्होंने कुछ मरीजों से भी बात की और अस्पताल के कर्मचारियों और इलाज के विषय में पूछा।
अस्पताल में सोती मिलीं ईएमओ
स्थान: ईएसआई अस्पताल रामदरबार
दिन व समय : रविवार रात 11.50 से 12.15 बजे तक
मनीमाजरा सिविल अस्पताल से स्वास्थ्य सचिव रामदरबार के ईएसआई अस्पताल पहुंचे तो ईएमओ डॉ. आकांक्षा एक कमरे में सो रही थीं। जब यशपाल गर्ग ने उन्हें अपनी पहचान बताई तो स्टाफ ने उन्हें इमरजेंसी में बुलाया। यहां पता चला कि बीते कुछ हफ्तों से एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। इमरजेंसी के एक मरीज को एक्सरे के लिए जीएमसीएच भेजा गया। इमरजेंसी में जहां एक मरीज भर्ती था, वहां का प्लास्टर टूटकर गिर रहा था। उस मरीज को दूसरे वार्ड में भेजा गया। यहां काम करने वाले सुरक्षाकर्मियों ने फरवरी 2021 से वेतन नहीं मिलने की बात बताई।
मोबाइल पर व्यस्त थीं ईएमओ, कर्मचारी सुन रहे थे चुटकुले
स्थान: जीएमसीएच-32
दिन व समय : रविवार रात 12.20 से 12.55 तक
रामदरबार के बाद स्वास्थ्य सचिव जीएमसीएच-32 पहुंचे। यहां सुरक्षाकर्मियों का सुपरवाइजर बीरेंद्र सिंह मोबाइल फोन में व्यस्त मिला। इमरजेंसी में आने व जाने वालों की उसे कोई परवाह नहीं थी। वहीं, इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. मोनिका इमरजेंसी में मौजूद नहीं थीं। वह भी पास के एक कमरे में मोबाइल पर व्यस्त मिलीं। सचिव जब इमरजेंसी में पहुंचे तो अटेंडेंट ओम प्रकाश एक पुलिसकर्मी समेत पांच-छह अन्य व्यक्तियों के साथ बिना मास्क गपशप करते और चुटकुले सुनाते मिला। सचिव यहां एक मिनट तक खड़े रहे। इसके बाद पूछा कि क्या ईएमओ हैं। जवाब मिला कि डॉक्टर कहीं गए हैं और वह सभी गपशप में व्यस्त हो गए। इसके बाद जब सचिव ने अपनी पहचान बताई और ईएमओ को बुलाने को कहा तो कर्मचारी सकते में आ गए। उनके साथ वह पास वाले कमरे में पहुंचे तो ईएमओ मोबाइल पर व्यस्त मिलीं। फिर इमरजेंसी में आकर बताया कि बस दो मिनट पहले ही यहां से गई थीं। इसके बाद सचिव ने यहां ऑक्सीजन प्लांट का भी दौरा किया।
ईएमओ देख रहे थे मरीज, एलएमओ भी थीं
स्थान : सिविल अस्पताल सेक्टर-45
दिन व समय : रविवार रात 1.00 से 1.10 बजे तक
जीएमसीएच-32 के बाद स्वास्थ्य सचिव सेक्टर-45 के सिविल अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने देखा कि ईएमओ डॉ. गुरप्रीत सिंह एक मरीज को देख रहे थे। वहीं, एलएमओ डॉ. अल्का भी मातृत्व वॉर्ड में मौजूद थीं।
कमरे में बैठी थीं ईएमओ, बाहर इंतजार कर रहा था मरीज
स्थान: सिविल अस्पताल सेक्टर-22
दिन व समय : रविवार रात 1.15 से 1.30 बजे तक
सेक्टर-45 के सिविल अस्पताल के बाद स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग सिविल अस्पताल सेक्टर-22 पहुंचे। यहां ईएमओ डॉ. कीर्ति कमरे में बैठीं थीं और बाहर मरीज इंतजार कर रहा था। बाद में वह बाहर आईं और मरीज को देखा। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जैसे ही मरीज की जानकारी मिली, उन्होंने मरीज को अटेंड किया।
गंभीर मरीज का इलाज कर रहे थे ईएमओ
स्थान : जीएमएसएच-16
दिन व समय : रविवार रात 1.35 से 1.45 बजे तक
आखिर में स्वास्थ्य सचिव जीएमएसएच-16 पहुंचे। यहां उन्होंने देखा कि ईएमओ डॉ. सत्यमम एक गंभीर मरीज के इलाज में व्यस्त हैं। इसलिए स्वास्थ्य सचिव ने उन्हें परेशान नहीं किया और उनसे मिले बिना ही लौट गए।
जीएमसीएच-32 शराब पीने वालों के खिलाफ पुलिस में दी शिकायत
जीएमसीएच-32 की जांच के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने पाया कि ऑक्सीजन प्लांट के सामने 5 से 6 व्यक्ति दो गाड़ियों में बैठकर शराब पी रहे हैं। दोनों गाड़ियों के दरवाजे खुले थे और सभी बहस कर रहे थे। इस दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग भी कर रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि वह यहां क्या कर रहे हैं तो उन्होंने बताया कि वह सिर्फ यहां खाना खाने आए थे। उन्हें 100 नंबर पर पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी गई, जिसके बाद सभी वहां से निकल गए। इसे लेकर स्वास्थ्य सचिव की तरफ से एसएसपी को शिकायत दी गई है कि कार नंबर से पहचान करके उन व्यक्तियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।