बच्चों ने की थी घटिया खाने की शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई
उपचाराधीन बच्चों ने बताया कि उन्हें स्कूल में तीन टाइम खाना दिया जाता है। कुछ दिनों से खराब गुणवत्ता वाला खाना दिया जा रहा था, जिसकी शिकायत भी की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शुक्रवार रात को खाना खाने के बाद ही तबीयत खराब होने लगी थी। इसके बाद 18 बच्चियों को अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद शनिवार सुबह 56 और छात्राओं हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इमरजेंसी वॉर्ड में तैनात डॉक्टरों की टीम ने तुरंत बच्चों का उपचार शुरू कर दिया, जिससे उनकी हालत अब स्थिर है। शनिवार शाम तक दो छात्राओं को छोड़कर शेष 72 को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
अभिभावकों में दिखा रोष
सूचना मिलते ही विधायक नरिंदर कौर भराज ने पहले मेरिटोरियस स्कूल का दौरा किया और फिर सिविल अस्पताल में बच्चियों की हालत की जानकारी ली। विधायक ने कहा कि इस मामले में कोताही बरतने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वहीं बच्चों की हालत देखकर अभिभावकों में काफी रोष है। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
सूचना मिलते ही मेडिकल विभाग की टीमें स्कूल पहुंच गईं और बच्चों को अस्पताल लाया गया। खराब खाना खाने के कारण ही बच्चों की तबीयत खराब हुई है। विभाग की टीम ने खाने के सैंपल ले लिए हैं। - डॉ. अंजू सिंगला, सिविल सर्जन।
अब हर माह भरवाए जाएंगे फीडबैक फॉर्म
छात्राओं का हालचाल पूछने सिविल अस्पताल पहुंचे शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हर माह सभी मेरिटोरियस स्कूलों के छात्रों से फीडबैक फॉर्म भरवाए जाएंगे। लापरवाही मिलने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसका फॉर्म स्कूलों को भेज दिया गया है। वहीं, प्रदेश के अन्य नौ मेरिटोरियस स्कूलों में खाद्य पदार्थों के सैंपल शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने लिए हैं।