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बाय बाय 2016: मंत्री जी ने बहुत कुछ दिया, नए साल में भी कई उम्मीदें

Mon, 26 Dec 2016 04:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा के स्वास्‍थ्य मंत्री अनिल विज - फोटो : फाइल फोटो
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बेशक स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज साल भर बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे, लेकिन प्रदेश के लिए भी काफी कुछ किया। अब नए साल में काफी उम्मीदें हैं।
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एनएबीएच एक्रीडेशन के लिए चुने गए
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 2016 में आठ मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में एमआरआई की सुविधा, 14 जिला अस्पतालों में डायलिसिस और चार जिलों में कैथ लैब खोलने की दिशा में पहल हो चुकी है। प्रदेश के अस्पतालों की सुविधाओं के अपग्रेडेशन के बाद एनएबीएच एक्रिडेशन के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों और अस्पतालों का चयन किया गया है, ताकि बुनियादी सुविधाओं के स्तर में माकूल बदलाव किए जा सकें।

डॉक्टरों और स्टाफ को मिली राहत
अब तक पोस्टमार्टम के लिए महज 10 रुपये मिलने वाली राशि में प्रदेश सरकार ने 100 गुना इजाफा किया। कर्मियों को भी पोस्टमार्टम के मद में मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी कर दी गई। एसोसिएशन की अन्य मांगों पर भी स्वास्थ्य मंत्री ने चरणबद्ध तरीके से लागू करने का भरोसा दिया है। विभागीय जानकारी के मुताबिक डॉक्टरों और कर्मियों की मांग पर गौर कर, उन्हें ऐसा बनाया जा रहा है ताकि सरकारी नौकरियों की तरफ आकर्षण बढ़े। इससे मरीजों को सरकारी अस्पतालों में और अच्छी सेवाएं दी जा सकेंगी।
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परंपरागत चिकित्सा को प्रोत्साहन मिला

योगा
योग, यूनानी, सिद्धा और आयुर्वेद को भी बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने कई कोशिशें कीं। इनमें मेवात में यूनानी चिकित्सा संस्थान और अस्पताल को मंजूरी दी गई है। आयुर्वेद के डॉक्टरों का दर्जा बढ़ाने सहित लोेगों को इलाज के लिए परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को भी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर पंचकूला में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इससे पहले जिला, ब्लॉक के साथ साथ ग्रामीणों तक भी योग अपनाने वाले भारी तादाद में आगे बढ़कर आए।

18 जिलों में लिंगानुपात में आया सुधार
कन्या भ्रूण हत्या पर शिकंजा कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरे साल सभी जिलों में छापेमारी की। इस अभियान के दौरान पकड़े गए 68 डॉक्टरों को गैर कानूनी तौर पर लिंग जांच में शामिल होने पर सजा भी दी गई। 613 केंद्रों का पंजीकरण रद कर दिया गया।

अनिल विज के मुताबिक प्रदेश के जिलों में गठित टास्क फोर्स की सख्ती और लिंग जांच की जानकारी देने वालों को मिले प्रोत्साहन से भी इस कुरीति पर शिकंजा कसना संभव हो सका। प्रदेश के 12 जिलों में लिंगानुपात 900 से अधिक है।

नए साल 2017 में किए पूरे किए जाएंगे ये प्रोजेक्ट

निजी संस्थानों पर रखी जाएगी नजर
कुछ दिनों पहले फरीदाबाद के एक निजी मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन की अनदेखी का शिकार हुए छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके लिए हरियाणा सरकार की ओर से तमाम कोशिशें की गईं, लेकिन जरूरत है कि निजी चिकित्सा संस्थानों के लिए ऐसी नीति तैयार की जाए, ताकि अचानक इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित अन्यकॉलेज बंद कर, सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न कर सकें। इस दिशा में भी स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की ओर से तैयारियां की जा रही हैं और शिक्षण संस्थानों से अग्रिम तौर पर बड़ी राशि बतौर सुरक्षा रखने की योजना बनाई जा रही है, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य की अनदेखी न हो।

डॉक्टर की कमी दूरी होगी
प्रधानमंत्री की ओर से रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के फैसले को हरियाणा में भी लागू किया गया। अब डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 साल हो गई है। माना जा रहा है राज्य के अनुभवी और रिटायर्ड डॉक्टरों की क्लीनिकल सेवाओं में नियुक्ति से मरीजों को सरकारी अस्पतालों में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाई जा सकेंगी। उधर, 661 डॉक्टरों की नियुक्ति की भी प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैं। जिनके 2018 में ज्वाइन करने के बाद प्रदेश में डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

नियुक्त होंगे पैरा मे​डिकल स्टाफ
एएनएम, लैब टेकिभनशियन, रेडियोलॉजिस्ट, फार्मासिस्ट सहित अन्य पदों पर 2881 कर्मियों की भर्ती के लिए हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन ने प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा कर दी है। चयन प्रक्रिया पूरी होने पर प्रदेश भर के अस्पतालों में मेडिकल जांच की तमाम सुविधाएं और त्वरित और बेहतर हो जाएंगी। अब तक सरकारी अस्पतालों में इलाज के अच्छे डॉक्टरों के होने के बाद भी जांच के लिए निजी लैब का रुख करने की मजबूरी है। पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति से जांच के मद में आने वाले खर्च में कमी के साथ साथ परेशानियों भी कम होंगी।
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साल 2016 में पूरे नहीं हो सके ये काम

online doctor
सभी अस्पताल ऑनलाइन नहीं हो सके
प्रदेश भर के अस्पतालों को ऑनलाइन करने की योजना को भी अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। इसके लिए सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों में मरीजों का डाटाबेस इकट्ठा किया जा रहा है।

आने वाले दिनों में इसे जोड़ने की योजना है, ताकि प्रदेश के किसी भी अस्पताल में इलाज के लिए मरीजों को बार बार अपनी हिस्ट्री बताने की जरूरत नहीं होगी। एक क्लिक में मरीजों की प्रोफाइल होगी, जिसमें बीमारी, इलाज करने वाले डॉक्टरों सहित तमाम जानकारियां उपलब्ध होंगी।

नए साल में मरीजों के लिए हेल्थ कार्ड
प्रदेश सरकार ने मरीजों के लिए हेल्थ कार्ड की घोषणा की, लेकिन इसे 2017 में पूरा किए जाने की उम्मीद है। हेल्थ कार्ड से मरीजों को किसी भी सुविधा या सेवा के इस्तेमाल में काफी आसानी हो जाएगी, जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहल तेज कर दी है।
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