चीफ मेडिकल अफसर डा. वंदना भाटिया और राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी के बीच चल रहा ऑडियो विवाद भड़क गया है। अब मंत्री सीएमओ के निलंबन पर अड़ गए हैं।
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स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखकर सीएमओ वंदना भाटिया को निलंबित करने की सिफारिश की है। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से सीएमओ वंदना भाटिया और राज्यमंत्री कृष्ण बेदी के बीच विवाद चल रहा है।
पहले सीएमओ पर दुर्व्यवहार के आरोप लगे। अब विवाद की जड़ है राज्यमंत्री और सीएमओ के बीच मोबाइल वार्ता की वो रिकार्डिंग जो वायरल हो चुकी है। हालांकि इस रिकार्डिंग में सीएमओ और राज्यमंत्री की तकरार रिकॉर्ड है।
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सरकार इस बात से खफा है कि राज्यमंत्री के फोन की आखिरकार रिकार्डिंग क्यों की गई और रिकार्डिंग करने के बाद ये मोबाइल रिकार्डिंग को वायरल क्यों किया गया।
सरकार इस बात को मालूम करना चाहती है कि जब ये बात सीएमओ और राज्यमंत्री के बीच हुई थी, तो किस व्यक्ति ने इस मोबाइल रिकार्डिंग को वायरल किया? इस मोबाइल रिकार्डिंग को वायरल करने के पीछे आखिर मकसद क्या था?
रिकार्डिंग जो वायरल हो चुकी है
चीफ मेडिकल अफसर डा. वंदना भाटिया और राज्यमंत्री कृष्ण कुमार बेदी के बीच चल रहा विवाद और तूल पकड़ने लगा है। इस विवाद की बड़ी जड़ है राज्यमंत्री और सीएमओ के बीच मोबाइल वार्ता की वो रिकार्डिंग जो वायरल हो चुकी है। हालांकि इस रिकार्डिंग में सीएमओ और राज्यमंत्री की तकरार रिकॉर्ड है।
लेकिन सरकार इस बात से खफा है कि राज्यमंत्री के फोन की आखिरकार रिकार्डिंग क्यों की गई और रिकार्डिंग करने के बाद ये मोबाइल रिकार्डिंग को वायरल क्यों किया गया।
सरकार इस बात को मालूम करना चाहती है कि जब ये बात सीएमओ और राज्यमंत्री के बीच हुई थी, तो किस व्यक्ति ने इस मोबाइल रिकार्डिंग को वायरल किया? इस मोबाइल रिकार्डिंग को वायरल करने के पीछे आखिर मकसद क्या था?
भारतीय टेलीकॉम एक्ट के तहत अपराध
दरअसल, सरकार इन तमाम बातों का जवाब इसलिए चाहती है, क्योंकि सरकार इस कृत्य को सरकार को बदनाम करने की बड़ी साजिश मान रही है। ‘अमर उजाला’ से बातचीत करते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि राज्यमंत्री की रिकॉर्डिंग करना और फिर उसे वायरल करना ये बहुत हैरतअंगेज बात है।
उनके अनुसार वैसे तो ये भारतीय टेलीकॉम एक्ट के तहत अपराध भी है। लेकिन सरकार इस बात को जानना चाहती है कि मोबाइल रिकार्डिंग और उसे वायरल करने के पीछे किसका हाथ है और क्या मकसद है। विज के अनुसार ये कृत्य सीधे-सीधे सरकार को बदनाम करने की बड़ी साजिश है, जिसे लेकर प्रदेश सरकार बेहद खफा है।
विज के अनुसार ये मामला अब उन तक सीमित नहीं है, इस मामले को अब सीधे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर देख रहे हैं। इस मामले में क्या करना है? क्या नहीं, ये भी सीएम खट्टर ही तय करेंगे। क्योंकि राज्यमंत्री ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत सीएम खट्टर से कर दी है। लेकिन सरकार को बदनाम करने की नीयत से इस तरह की साजिश तो कतई बरर्दाश्त के काबिल नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री के सामने सीएमओ ने रखा पक्ष
उधर, शनिवार अपराह्न इसी मामले में कुरुक्षेत्र की सीएमओ डा. वंदना भाटिया अपने परिजनों के साथ मुलाकात करने अंबाला कैंट स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के आवास पर पहुंची।
डा. वंदना ने मंत्री के समक्ष अपना पूरा पक्ष रखा। उसके बाद वे रवाना हो गई। डा. वंदना से कहा कि वे इस मसले पर मंत्री के समक्ष अपना पक्ष रखने आई थी और उन्होंने मंत्री को सारी को वस्तुस्थिति से अवगत करवा दिया है।
उधर, इस बारे में सेहत मंत्री अनिल विज ने कहा कि सीएमओ ने उनके समक्ष अपना पक्ष रखा है और वे उनका पक्ष ज्यों के त्यों सीएम खट्टर के समक्ष रख देंगें, क्योंकि वे ही अब इस मसले को देख रहे हैं। सीएम खट्टर ही मामले में आगामी कार्रवाई करेंगे।
हरियाणा सरकार के लिए मुश्किल बनी कुरुक्षेत्र की सीएमओ और राज्यमंत्री के बीच हुई तकरार में मंत्री का पलड़ा भारी पड़ा है। सरकार ने देर रात सीएमओ डा. वंदना भाटिया को हटाकर उनके स्थान पर डा. रामिंद्र सिंह को कुरुक्षेत्र का सीएमओ नियुक्त किया है।
खट्टर सरकार में दिन भर चली माथापच्ची के बाद रात करीब साढ़े नौ बजे सीएमओ की कुरुक्षेत्र से हटा दिया गया है। अभी उन्हें नियुक्ति प्रतीक्षा में रखा गया है। सरकार ने उनकी नियुक्ति के संदर्भ में कोई निर्णय नहीं लिया है।
मंत्री और सीएमओ के बीच हुए इस विवाद का हल ढूंढने के लिए मुख्यमंत्री खट्टर ने अपने करीबी मंत्रियों और अधिकारियों से भी मश्विरा किया। यहां तक कि बातचीत की रिकार्डिंग भी मुख्यमंत्री ने सुनी। इसके बाद कानूनी अधिकारियों से भी राय ली गई है। देर रात तक सरकार इस गुत्थी का हल निकालने में जुटी रही।
मनोहर सरकार के सभी मंत्री अपने सहयोगी मंत्री बेदी के साथ हैं और सीएमओ की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अधिकतर मंत्री इस नतीजे पर पहुंचे कि बेदी ने सीएमओ के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया और कोई भी मंत्री अपने जिले के अधिकारी को फोन कर लोगों के काम के लिए कह सकता है।
मुख्यमंत्री ने इस बारे में बेदी से भी अलग बातचीत की। बेदी ने मुख्यमंत्री को बताया कि सीएमओ कई दिनों से फोन नहीं उठा रही थीं। उन्होंने उनके साथ सामान्य बातचीत शुरू की और इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जो कार्रवाई करनी है कर लो। यह भाषा किसी जनप्रतिनिधि के प्रति उचित नहीं कही जा सकती।