कैथल के गांव पाई से किसान की बेटी पुष्पा ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा के कॉमर्स संकाय में प्रदेश में टॉप किया है। केवीएम स्कूल की पुष्पा ने सेल्फ स्टडी के बल पर 498 (99.60) अंक हासिल कर साबित कर दिया कि प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। पुष्पा का सपना सीए बनने का है। रोजाना पांच से छह घंटे तक पढ़ाई करती थी। उनके पिता जोरा सिंह किसान हैं और साथ ही दुकान भी है। मां सुनीता देवी गृहिणी हैं। एक बहन और दो भाई हैं। छात्रा ने बताया कि उसने कभी ट्यूशन नहीं ली। घर पर ही पढ़ाई की। उसे पूरी उम्मीद थी कि वह बड़ी सफलता हासिल करेगी।
किसान की बेटी सिमरन बनना चाहती है सीए
कॉमर्स संकाय में प्रदेश में तीसरा स्थान लेने वाली भूना के न्यू सन राइज स्कूल की छात्रा सिमरन सीए बनना चाहती है। सिमरन ने 500 में से 495 अंक लिए हैं। सिमरन का कहना है कि उसका सपना है कि वह सीए बने और इसे वह पूरा करेगी। सिमरन ने बताया कि वह सोशल मीडिया से दूर रही हैं, यह ध्यान भटकाता है। पढ़ाई के लिए ध्यान जरूरी है। उसने स्कूल के बाद 5 से 6 घंटे पढ़ाई करके इस कामयाबी को पाया है। खाली समय में पिता के साथ भी हाथ बंटवाया है।
म्यूजिक सुनकर करती थी खुद को रिलेक्स: अंशु
12वीं में कॉमर्स संकाय में 496 अंक लेकर प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहने वाली हिसार पीजीएसडी स्कूल की छात्रा अंशु का लक्ष्य आईआईएम से एमबीए करके खुद का बिजनेस खड़ा करने का है। हर रोज 6 से 8 घंटे पढ़ने वाली अंशु ने बताया कि उसने पढ़ाई का शेड्यूल बनाया हुआ था। 12वीं कक्षा शुरू होने के साथ ही शेड्यूल बनाकर पढ़ना शुरू कर दिया था।
लगातार पढ़ने के बाद खुद को रिलेक्स करने के लिए म्यूजिक सुनती थी और कभी-कभी डांस भी करती थी। कभी-कभार दोस्तों के साथ पार्टी भी करती थी। परीक्षा के दौरान किसी तरह का स्ट्रेस नहीं लिया। कोरोना को लेकर मन में थोड़ा डर बना हुआ था कि पेपर न हुए तो अच्छे नंबर नहीं आएंगे। अब रिजल्ट अच्छा आया है। भगत सिंह चौक की रहने वाली अंशु के पापा विरेंद्र कुमार लोडिंग का काम करते हैं, जबकि मम्मी रजनी हाउस वाइफ हैं। अंशु ने अंग्रेजी, कंप्यूटर व बिजनेस स्टडीज में 100 में से 100 अंक और अकाउंट्स में 99, मैथ में 98 व अर्थशास्त्र में 94 अंक हासिल किए हैं।
छात्रा मुस्कान और विशाखा।
जींद के एसडी कन्या महाविद्यालय की छात्रा मुस्कान ने कॉमर्स संकाय में 496 अंक लेकर प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया। मुस्कान के पिता सुरेंद्र किराना की दुकान चलाते हैं और छात्रा की मां किरण गृहिणी हैं। मुस्कान सीए बनना चाहती है। मुस्कान ने कहा कि शुरुआत से ही उसका फोकस पढ़ाई पर था। छात्रा ने बताया कि उसने बिना ट्यूशन ही घर पर आठ से दस घंटे पढ़ाई कर सफलता प्राप्त की है। मुस्कान चार भाई-बहन हैं। मुस्कान की बड़ी बहन मंजू ने राजकीय पीजी कॉलेज जींद से अभी एमकॉम किया है। वहीं भाई ललित राजकीय केएम कॉलेज नरवाना से स्नातक कर रहा है। मुस्कान का छोटा भाई गौरव अभी आदर्श स्कूल में 10वीं कक्षा का छात्र है।
आईएएस बनना चाहती है विशाखा
हरियाणा बोर्ड की 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम में एसडी कन्या महाविद्यालय की कॉमर्स संकाय की छात्रा विशाखा ने 495 अंक लेकर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया। विशाखा के पिता वीरेंद्र की स्पेयर पार्ट्स की दुकान है और मां अंजू गृहिणी हैं। विशाखा आईएएस बनकर देश की सेवा करनी चाहती है। विशाखा ने बताया कि शुरू से ही उसने टीवी से दूरी बनाई रखी और ट्यूशन भी नहीं लिया। छात्रा ने बताया कि उसने बिना ट्यूशन ही घर पर आठ से दस घंटे पढ़ाई कर सफलता प्राप्त की है। विशाखा तीन भाई-बहन हैं। बड़ी बहन लविशा डीयू से स्नातक कर रही है और छोटा भाई संयम मित्तल अभी 10वीं कक्षा में पढ़ रहा है।
टैक्सी ड्राइवर के बेटे ने हासिल किया तीसरा स्थान, सीए बनने की चाहत
कुरुक्षेत्र के इस्माईलाबाद के जसप्रीत सिंह ने कॉमर्स संकाय में 495 (99 प्रतिशत)अंक हासिल कर प्रदेश स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया है।राजकीय आदर्श संस्कृत वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के छात्र जसप्रीत सिंह ने अंग्रेजी में 100, हिन्दी में 98, गणित में 97, अकाउंट में 99 और बिजनेस में 99 अंक हासिल किए हैं। पिता अतर सिंह टैक्सी चलाते हैं और माता हरविंदर कौर गृहिणी है। वह सीए बनना चाहता है। बड़े भाई गुरविंदर सिंह पंजाबी यूनिवर्सिटी से एमएससी कर रहे हैं। स्कूल के बाद करीब 4 से 5 घंटे सेल्फ स्टडी की।
रेवाड़ी के पीजीएम भडंगी स्कूल की छात्रा गांव बालावास जाट निवासी बबीता पुत्री लक्ष्मी नारायण ने कॉमर्स संकाय में 500 में 495 अंक लेकर सूबे में टॉप थ्री में स्थान बनाया। छात्रा की इस कामयाबी से परिवार ही नहीं जिले का मान भी बढ़ा है। पिता गांव में ही किराना की दुकान चलाते हैं। बबीता ने बताया कि वह सीए बनकर पिता के सपनों को पूरा करना चाहती है।
स्कूल के अलावा घर में प्रतिदिन 6 घंटे की पढ़ाई से ही यह मुकाम मिला है। बबीता ने बताया कि गांव में ऐसा नहीं कि आप पूरा दिन पढ़ते रहें, घर के दैनिक कार्यों में जरूर हाथ बंटाना पड़ता है। बबीता का कहना है कि स्कूल में दिए काम को यदि रटने की बजाय ईमानदारी से घर पर आकर रूटीन में पूरा किया जाए तो टॉपर बना जा सकता है। छात्रा ने कहा कि कभी नहीं सोचा था कि प्रदेश में तीसरा स्थान मिलेगा लेकिन एक दिन भी स्कूल की छुट्टी नहीं की। बोर्ड परीक्षा के चलते पूरा एक साल टीवी और मोबाइल से भी दूरी बनाए रखी।