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ट्रेसिंग टीम के हौसले को सलाम.. एक साल से बिना रुके संक्रमण की चेन तोड़ने का कर रही काम

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चंडीगढ़। शहर में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है, लेकिन इसकी चेन को तोड़ने में कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम की बड़ी भूमिका रही है। बापूधाम हो या वर्तमान में मनीमाजरा, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम अपने काम में पूरी तन्मयता से लगी है। टीम में कुछ सदस्य ऐसे हैं जो वर्ष 2020 से लगातार कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का ही काम देख रहे हैं। वहीं कुछेक सदस्य कोरोना संक्रमित होने के बाद ठीक होकर वापस अपनी टीम के साथ जुड़ गए हैं। पिछले एक साल से इस टीम की न कोई छुट्टी हुई है और न समय निर्धारण। जब संक्रमित मरीज की सूचना मिलती है तो टीम के सदस्यों को तत्काल मौके पर पहुंचना होता है। बिना किसी अतिरिक्त लाभ के लगातार मैदान में डटी इस टीम का ही योगदान है कि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा रहा है।
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एक साल तक लगातार डाटा तैयार किया
कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग टीम के प्रभारी गगन शर्मा पिछले एक साल से लगातार संक्रमित मरीजों का डाटा तैयार कर रहे हैं। टीम को कब और कहां जाना है, साथ ही मरीज की क्या व्यवस्था करनी है, इसकी जिम्मेदारी गगन शर्मा के पास ही रहती है। गगन के साथ नवीन कुमार व अमरजीत सिंह को भी लगाया गया है। जो टीम के साथ मिलकर अतिरिक्त कार्य करते हैं।
संक्रमित हुए, जज्बा कम नहीं हुआ
टीम के सदस्य परमवीर ठाकुर पिछले साल साल से ही टीम के साथ जुड़े हैं। संक्रमित मरीजों के घर जाकर उन्हें एकांतवास में भेजना और उनके संपर्क में आने वाले लोगों को ट्रेस करने की जिम्मेदारी भी निभाई है। इस बीच परमवीर कोरोना संक्रमित हो गए। इसके बावजूद परमवीर वापस लौटे और फिर से टीम के साथ जुड़ गए हैं।
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रात को 2 बजे भी क्वारंटीन करने गए हैं
वर्ष 2020 से लगातार कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम के साथ जुड़े कपिल का कहना है कि हमारा कभी कोई समय तय नहीं है। परिवार के साथ कभी समय बिताने का विचार भी किया है तो कोई न कोई केस आ जाता है। हमने रात को 2 बजे भी जाकर लोगों को एकांतवास में भेजा है, ताकि इस चेन को बढ़ने से किसी तरह रोका जाए।
बापूधाम था मुख्य लक्ष्य, उसे जीता
टीम लीडर सतेंद्र ने बताया कि पिछले साल बापूधाम कोरोना का हॉट स्पॉट क्षेत्र था। जब वहां मरीजों के संख्या 100 से ऊपर पहुंची तो कोई जाने को तैयार नहीं था। तब हमारा लक्ष्य था कि किसी तरह इस पर काबू पाना है। थोड़ा समय लगा, लेकिन हमने बापूधाम में इस चेन को तोड़ने में सफलता हासिल की।
इस महामारी ने हमें धैर्य रखना सिखाया है
टीम लीडर सुनील रोहिल्ला का कहना है कि हमारा लक्ष्य रहा है कि किसी तरह कोरोना की चेन को तोड़ा जाए। हाल ही में एक ऐसा व्यक्ति संक्रमित मिला था जो बरामदे में सोता था। उसे एकांतवास में भेजने के लिए कोई जगह नहीं थी। हमने टीम प्रभारी से संपर्क किया और किसी तरह उसे एकांतवास में भेजा। कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के चक्कर में लोग झल्ला भी जाते हैं। इस कोरोना ने हमें धैर्य रखना भी सिखाया है।
18 गाड़ियां लगी हैं ट्रेसिंग में, अब तक 7 करोड़ खर्च
कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग में अभी 18 गाड़ियां लगी हैं। एक गाड़ी का एक माह का खर्च लगभग 4 लाख रुपये है। इस तरह सभी गाड़ियों पर एक माह में लगभग 72 लाख रुपये खर्च हो जाता है। वर्ष 2020 में से अक्तूबर तक 18 गाड़ियां चलीं थीं। उसके बाद केस कम हुए तो गाड़ियों की संख्या घटाकर 5 कर दी गई। अप्रैल 2021 से टीम के साथ गाड़ियों की संख्या भी बढ़ाकर 18 कर दी गई है। अब तक गाड़ियों पर लगभग 7 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। यह पूरा पैसा कोविड सेस से निकाला जाता है।
कोविड सेस का अब तक इकठ्ठा हुआ 26 करोड़ फंड
पिछले साल कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार ने शराब की बोतलों पर 5 रुपये कोविड सेस लगा दिया था। अब तक नगर निगम को इस सेस से 26 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। निगम इसमें से मास्क, सेनेटाइजर, ग्लब्स, पीपीई किट, कोरोना स्पेशल गाड़ियों का खर्चा करता है। इस फंड के केवल कोरोना से जुड़े कार्यों में ही उपयोग किया जा सकता है।
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