हरियाणा की जेलों में सजा काट रहीं महिला कैदियों के छह वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को अब पढ़ाई के लिए भटकने की जरूरत नहीं होगी। हाल ही में जेल प्रशासन ने एक एनजीओ के साथ करार किया है। इसके तहत बच्चों की पढ़ाई, खानपान सहित उनके रहने का भी इंतजाम संस्था की ओर से किया जाएगा। इससे हरियाणा की जेलों में बंद करीब सौ बच्चों के भविष्य को अंधकारमय होने से बचाया जा सकेगा।
हरियाणा की जेलों में बंद करीब 18 हजार कैदियों में से 750 के करीब महिला कैदी हैं। अलग-अलग मामलों में जेलों में सजा काट रही या विचाराधीन कैदियों के बच्चों की आयु छह साल (जिन्हें घर में रखने वाला कोई नहीं है) पूरी होने पर उन्हें किसी संस्था या अनाथालय भेज दिया जाता था, लेकिन इस स्थिति में बच्चों की पढ़ाई, रहनसहन और खानपान की भी उनकी माताओं की चिंता सताती रहती थी।
जेल प्रशासन के मुताबिक कई बार कैदियों के परिजन भी बच्चों (छह साल की उम्र पूरी करने पर) को रखने से इंकार कर देते हैं। ऐसे में पंजाब की एक संस्था सरबत का भला के साथ समझौता किया है। संस्था ने ऐसे सभी बच्चों की पढ़ाई और खानपान के अलावा उनके रहने के लिए भी इंतजाम करने का भरोसा दिया है। इससे बच्चों को अनाथालय में नहीं रहना होगा और न ही उनकी माताओं को पढ़ाई की चिंता सताएगी।
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संस्था के साथ करार किया गया है, ताकि छह साल की उम्र पूरी होने पर बच्चों को रहने, पढ़ने सहित अन्य सुविधाएं मिल सके। अब तक यह सुविधा न होने के कारण बच्चों के भविष्य को लेकर महिला कैदियों की चिंता बनी रहती थी।
- यशपाल सिंघल, डीजी, जेल (हरियाणा)