जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित कर दिया गया है, जिसे 6 महीने में रिपोर्ट पेश करनी है। आयोग का गठन जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस (रिटायर्ड) एसएन झा की अध्यक्षता में कमीशन ऑफ इनक्वायरी एक्ट, 1952 के अंतर्गत किया।
यह दो सदस्यीय आयोग होगा, जो बीती 18 से 23 फरवरी के बीच जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रोहतक, झज्जर, सोनीपत, जींद, हिसार, कैथल और भिवानी में जानमाल की हानि, निजी और सार्वजनिक संपत्ति सहित सड़कों, नहरों, रेलवे स्टेशनों, पुलिस स्टेशनों को नुकसान पहुंचाने, अवैध रूप से पेड़ों को काटकर रास्तों को बंद करने और मानवाधिकारों का हनन से संबंधित सभी घटनाओं और उनकी परिस्थितियों की जांच करेगा।
आयोग यह भी जांच करेगा कि प्रदेश में आंदोलन के दौरान सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने को षड्यंत्र तो नहीं रचा गया था। इस आयोग के अन्य सदस्य, पूर्व आईपीएस अधिकारी एनसी पाधी होंगे, जो केन्द्र सरकार में सुरक्षा सचिव रह चुके हैं।
6 महीने के अंदर रिपोर्ट पेश करने के आदेश
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल ही में राज्य विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में घोषणा की थी कि आरक्षण आंदोलन के दौरान आगजनी और उपद्रव की घटनाओं की जांच कराने के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया जाएगा।
यह आयोग व्यक्तिगत या संगठनों के माध्यम से आयोग के समक्ष की जाने वाली शिकायतों और आरोपों की विशेषतौर पर जांच करेगा। यह आयोग अपनी पहली बैठक की तिथि से छह माह के भीतर अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द राज्य सरकार को सौंपेगा। आयोग का मुख्यालय चंडीगढ़ में होगा।