हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए मतदान जारी है। कांग्रेस उम्मीदवार अजय माकन के लिए निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। वैसे हरियाणा राज्यसभा चुनाव में उलटफेर कर निर्दलीयों के जीतने का सिलसिला 2004 से चला आ रहा है। जून 2016 में सुभाष चंद्रा के चुनाव में ही सियासी समीकरण नहीं बदले, जून 2004 में भी किरण चौधरी को हराकर निर्दलीय त्रिलोचन सिंह राज्यसभा सांसद बन चुके हैं।
2004 में हरियाणा से राज्यसभा की 2 सीटों के लिए हुए मतदान में इनेलो के अजय चौटाला और कांग्रेस की किरण चौधरी मैदान में थीं। निर्दलीय प्रत्याशी सरदार त्रिलोचन सिंह उस समय राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन थे। उन्हें भाजपा और इनेलो के अलावा कुछ निर्दलीय विधायकों ने समर्थन देकर जिता दिया था। किरण चौधरी नहीं जीत पाई थीं, उस समय वह दिल्ली की राजनीति में सक्रिय थीं।
मतदान से तीन दिन पहले छह विधायकों को किया गया था अयोग्य घोषित
28 जून 2004 को मतदान होना था, लेकिन तीन दिन पूर्व तत्कालीन हरियाणा विधानसभा स्पीकर सतबीर सिंह कादयान ने सदन से छह विधायकों करण सिंह दलाल, जगजीत सिंह सांगवान, भीम सेन महेता, जय प्रकाश गुप्ता, राजिंदर सिंह बिसला और देव राज दीवान को दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत दायर याचिकाओं में निर्णय देते हुए विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके बाद वह सदन के सदस्य नहीं रहे। इनमें से 4 निर्दलीय विधायक थे और किरण चौधरी का समर्थन कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था स्टे, नहीं दे पाए थे वोट
हालांकि, 28 जून को वोटिंग के दिन सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें अयोग्य घोषित करने पर तो स्टे दे दिया, लेकिन वोटिंग का अधिकार नहीं मिला। उस समय विधानसभा में विधायकों की संख्या 86 थी, जो 6 के वोट न डाले जाने के कारण घटकर 80 रह गई थी। अजय चौटाला को 29 पहली प्राथमिकता वोट मिले, जबकि निर्दलीय त्रिलोचन सिंह को 28 वोट और किरण चौधरी को केवल 23 वोट मिले थे। मतगणना में किरण का एक वोट अमान्य होने से उनके कुल वोट 22 हो गए थे। यह जानकारी एडवोकेट हेमंत कुमार ने मुहैया करवाई है।