हरियाणा में नेशनल हाईवे-44 को चौड़ा करने के लिए खोदकर छोड़ देने से वाहन चालकों के साथ ही एक दर्जन गांवों के लोग परेशान हैं। इन गांवों के रास्ते बंद हो गए हैं और लोगों को जान जोखिम में डालकर अपने घरों तक पहुंचना पड़ रहा है। नेशनल हाईवे पर सभी गांवों के सामने एनएचएआई ने पहले कट बनाए थे और निर्माण कार्य शुरू होने से सभी जगह सड़क की खुदाई करके छोड़ने से कट बंद हो गए हैं। गांवों के सामने फ्लाईओवर बनाए जाने से लोगों को जहां समस्या दूर होने की उम्मीद थी, लेकिन काम अधूरा छोड़ देने से उनकी परेशानी बढ़ गई है।
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इसके अलावा गांवों में वाहनों को आने के लिए 3-5 किमी तक ज्यादा चक्कर लगाना पड़ता है। नेशनल हाईवे 44 मुबरका चौक से सिंघु बॉर्डर तक पहले ही आठ लेन बना हुआ था, जबकि उससे आगे छह लेन का नेशनल हाईवे था। इस नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक बढ़ने के कारण दिल्ली के सिंघु बॉर्डर से पानीपत तक 70.5 किमी छह लेन से आठ लेन की सड़क के साथ ही दो-दो लेन की सर्विस रोड बनाने का प्लान तैयार किया गया, जिसके बाद वर्ष 2015 में केजीपी व केएमपी के साथ ही राई से पीएम नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया।
नेशनल हाईवे के जिस 70.5 किमी के हिस्से का चौड़ीकरण किया जाना है, इस हिस्से में सड़क किनारे लगभग एक दर्जन गांव पड़ते हैं। नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले एनएचएआई ने इन सभी गांवों के सामने सड़क पार करने के लिए कट बनाए हुए थे, जिससे अपने गांव के सामने ही लोग सड़क पार कर सकें, लेकिन नेशनल हाईवे का निर्माण शुरू करते हुए सड़क की बीच से खुदाई करके छोड़ दिया गया है, जिससे सभी कट बंद होने के साथ ही गांवों के रास्ते भी नहीं बचे हैं।
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बनी रहती है दुर्घटना की आशंका
नेशनल हाईवे पर गांवों के सामने बनाए गए कटों पर फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है तो वहां सड़क की खुदाई करके छोड़ दिया गया है। जिसके चलते मार्ग के दोनों तरफ एक लेन की सड़क बनाई गई है। इस नेशनल हाईवे पर रोजाना लगभग डेढ़ लाख वाहन वाहन गुजरते हैं। हाईवे पर फ्लाईओवर निर्माण के चलते सड़क संकरी हो गई है।
साथ ही वाहनों के बढ़ते दबाव के चलते यहां वाहनों की कतार ही लगी रहती है। ऐसे में गांव में आने-जाने वाले लोगों को हमेशा दुर्घटना की आशंका सताती रहती है। लोगों को पहले वाहनों से बचते हुए सड़क किसी तरह पार करनी पड़ती है तो उसके बाद खुदाई करके छोड़ी गई सड़क के गड्ढ़ों के बीच से निकलना पड़ता है।
पैदल जाने वाले लोग किसी तरह से कुछ देर खड़े रहकर सड़क पार कर लेते हैं, लेकिन गांवों में जाने के लिए वाहन चालकों को 3-5 किमी तक का सफर तय करना पड़ता है। वह काफी दूरी पर पहले से बने फ्लाईओवर के नीचे से निकलकर ही आते है और उसके बाद अपने गांवों में जाते है।
इन गांवों के पास होती है परेशानी
नेशनल हाईवे पर जिन जगहों पर फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं और वहां उन फ्लाईओवर को अधूरा छोड़ दिया गया है, वहां ज्यादा परेशानी होती है। इनमें रसोई, राई 5 औद्योगिक क्षेत्र, राई गांव, सेक्टर 7 डिवाइडर रोड के सामने वर्धमान चौक, नांगल खुर्द, गोहाना बाईपास, हसनपुर, भिगान चौक, बड़ी औद्योगिक क्षेत्र, गढ़ी कलां, पट्टी कल्याणा, करहस, मछरौली, जटीपुरा आदि गांवों के सामने ज्यादा परेशानी होती है।
ये होते है नियम
-डायवर्जन देना जरूरी है, जिसके लिए पुरानी सड़क होने पर उससे काम चलाया जाता है या वहां नई सड़क बनाई जानी चाहिए।
-सुरक्षा को देखते हुए बेरिकेड लगाए जाने चाहिए।
-ऐसी जगहों पर संकेतक चिह्न वाले बोर्ड लगाए जाने चाहिए।
-वहां बोर्ड लगाकर यह लिखा जाए कि काम प्रगति पर है।
नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के सड़क खुदाई करके छोड़ दिया गया है, जिससे गांवों के सामने बनाए गए कट भी बंद हो गए हैं और सड़क पार करने के लिए लोगों को परेशानी होती है और जान का खतरा बना रहता है। सड़क पार करते हुए ही कई बार हादसे में लोगों की मौत हो चुकी है। - विजय सिंह, पूर्व सरपंच प्रीतमपुरा
नेशनल हाईवे का जिस तरह से काम किया जा रहा है, उससे लग रहा है कि यह अगले कई साल तक नहीं बनने वाला है। जबकि इसके चौड़ीकरण के लिए सड़क की खुदाई करके छोड़ दिया गया है। इस कारण लोगों की समस्या बढ़ गई है। सड़क पार करने में जान का खतरा बना रहता है। - मुकेश दहिया, नाहरी
नेशनल हाईवे को लोगों के फायदे के लिए चौड़ा किया जा रहा था, लेकिन अब इससे परेशानी बढ़ने लगी है। नेशनल हाईवे पार करने के लिए काफी दूर से वाहन घुमाकर लाना पड़ता है और जान का खतरा अलग से बना रहता है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। - जयराम शर्मा, बीसवां मिल
नेशनल हाईवे की खुदाई करके छोड़ने से आए दिन हादसे हो रहे हैं, क्योंकि सड़क के किनारे बसे गांवों के लोगों को मजबूरी में जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ती है और वाहन ज्यादा होने के कारण कई बार आधा घंटे तक खड़ा रहना पड़ता है। सड़क पार करने की कोई जल्दबाजी करता है तो हादसा हो जाता है। इसके लिए पूरी तरह से अधिकारी व निर्माण कंपनी जिम्मेदार है। - दीपक चौहान, जिलाध्यक्ष राजपूत महासभा