इसे राजनीति का खेल कहेंगे या अहम की लड़ाई। कल तक एकजुट होकर चुनाव में विरोधियों को मात देने के लिए रणनीति तैयार करने वाले कई नेता इस चुनाव में पुराने साथी की मुखालफत करेंगे।
कांग्रेस के कई ऐसे नेता जिन्होंने पाला बदलकर दूसरे दलों का दामन थाम लिया है।
अरविंद शर्मा
करनाल के पूर्व सांसद अरविंद शर्मा कांग्रेस के कद्दावर नेता रह चुके हैं। हर चुनाव में अरविंद शर्मा ने कांग्रेस के लिए अहम भूमिका निभाई लेकिन इस चुनाव से पहले वे बसपा में शामिल हो गए। बसपा ने अरविंद शर्मा को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया है। अरविंद शर्मा यमुनानगर से चुनाव लड़ रहे हैं। अपने चुनावी भाषण में वे हुड्डा पर जमकर निशाना साध रहे हैं।
कृष्णलाल पंवार: हाल ही में इनेलो छोड़ भाजपा में शामिल हुए हैं। उन्हें भाजपा ने इसराना से टिकट दिया है। वे भी इस चुनाव में कांग्रेस की खिलाफत करते नजर आएंगे। जबकि कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाली चंडीगढ़ की पूर्व मेयर राजबाला मलिक भी टिकट से महरूम होने के बावजूद कांग्रेस के खिलाफ चुनाव प्रचार कर रही हैं।
विनोद शर्मा
विनोद शर्मा हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी माने जाते रहे हैं। बीते विधानसभा चुनाव में हुड्डा और शर्मा की जोड़ी काफी हिट रही थी। लेकिन चुनाव से पहले विनोद शर्मा ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया और अपनी पार्टी बना ली।
उनकी पाटी हजपा इस चुनाव में हजकां से गठबंधन कर 24 सीटों पर लड़ रही है। विनोद शर्मा खुद अंबाला से चुनाव लड़ रहे हैं। शर्मा के भी निशाने पर भी कांग्रेस ही है।
धर्मवीर
धर्मवीर ने कांग्रेस में रह कर कई साल राजनीति की। पिछले हर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत दर्ज करवाने में अहम भूमिका अदा की। साल 2008 में सोहना से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीब भी रहे लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए और इस समय भिवानी से सांसद है। इस समय कांग्रेस की रणनीति फेल करने में लगे हुए हैं।
बीरेंद्र सिंह
कांग्रेस के सारथी रहे प्रदेश के दिग्गज नेता बीरेंद्र सिंह इस बार भाजपा के लिए प्रचार कर रहे हैं। बीरेंद्र सिंह मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी दोस्त रहे हैं। दोनों चंडीगढ़ में एक स्कूल में पढ़ चुके हैं। लेकिन हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा में शामिल हो गए और टिकट न मिलने के बावजूद भाजपा को बहुमत दिलवाने के लिए प्रचार कर रहे हैं।
राजकुमार वाल्मीकि
लोकसभा चुनाव में राजकुमार वाल्मीकि कांग्रेस के टिकट पर अंबाला से लड़े। चुनाव में मिली मात के बाद पाला बदलकर भाजपा में शामिल हो गए। वाल्मीकि ने भाजपा से विधानसभा का टिकट मांगा था। टिकट नहीं मिलने के बाद सोमवार को वे इनेलो में शामिल हो गए।
राव इंद्रजीत सिंह
अहीरवाल के दिग्गज राव इंद्रजीत सिंह ने कांग्रेस में रहकर कई साल तक विपक्ष को घेरा। लेकिन विकास में भेदभाव के आरोप लगा कर कांग्रेस छोड़ी। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा के टिकट पर गुड़गांव से सांसद बने राव इंद्रजीत इस समय केंद्रीय राज्य मंत्री हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों को पछाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।