फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब काम न करने वाले सरपंचों को हटा सकेंगे ग्रामीण, हरियाणा विधानसभा में विधेयक पास

Fri, 06 Nov 2020 08:12 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • हरियाणा सरकार ने सदन में पारित किया महत्वपूर्ण हरियाणा पंचायती राज द्वितीय संशोधन विधेयक
  • 33 फीसदी अविश्वास प्रस्ताव के बाद होगा गुप्त मतदान, विरोध में 67 फीसदी मत पड़े तो हटेगा जन प्रतिनिधि
विज्ञापन
हरियाणा विधासनभा। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा सरकार ने पंचायती राज से जुड़े एक विधेयक में संशोधन करते हुए तीन महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इन फैसलों में राइट टू रीकॉल, पंचायती चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण और बीसी-ए वर्ग के पिछड़ों को भी 8 फीसदी आरक्षण दिए जाना शामिल हैं। विधानसभा में सरकार ने शुक्रवार को हरियाणा पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2020 पारित कर इन अहम फैसलों को लागू किया।

विज्ञापन


उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सदन में इस संशोधन विधेयक को पेश किया। जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। इस दौरान ग्राम पंचायतों के लिए ‘राइट टू रीकॉल’ विधेयक भी पटल पर रखा गया। इस विधेयक के लागू होने से काम ना करने वाले सरपंचों, ब्लाक समिति सदस्यों व जिला परिषद सदस्यों को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटाने का अधिकार ग्रामीणों को मिल गया है। 

विधानसभा में पास हुए ‘राइट टू रीकॉल’ विधेयक के बारे में डिप्टी सीएम ने बताया कि पंचायत विभाग के पास अकसर इस तरह की शिकायतें आती थी कि सरपंच मनमानी करके ग्रामीणों की जन भावनाओं के खिलाफ कार्य कर रहा है। हर साल इस तरह के सैकड़ों शिकायतें ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर और प्रदेश मुख्यालय तक पहुंचती है। डिप्टी सीएम ने बताया कि राइट टू रीकॉल का विधेयक पास होने के बाद अब ग्रामीणों के पास यह अधिकार आ गया है कि अगर सरपंच गांव में विकास कार्य नहीं करवा रहा तो उसे बीच कार्यकाल में ही पद से हटाया भी जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे हटाए जाएंगे ग्रामीण जन प्रतिनिधि 

जन प्रतिनिधियों को हटाने के लिए गांव के 33 प्रतिशत मतदाता अविश्वास लिखित में शिकायत संबंधित अधिकारी को देंगे। यह प्रस्ताव खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी तथा सीईओ के पास जाएगा। इसके बाद ग्राम सभा की बैठक बुलाकर दो घंटे के लिए चर्चा करवाई जाएगी। इस बैठक के तुरंत बाद गुप्त मतदान करवाया जाएगा और अगर 67 प्रतिशत ग्रामीणों ने जन प्रतिनिधि के खिलाफ मतदान किया तो वे पदमुक्त हो जाएगा। 

जनप्रतिनिधि चुने जाने के एक साल बाद ही इस नियम के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकेगा। अगर अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरपंच के विरोध में निर्धारित दो तिहाई मत नहीं पड़ते हैं तो आने वाले एक साल तक दोबारा अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा। इस तरह ‘राइट टू रीकॉल’ एक साल में सिर्फ एक बार ही लाया जा सकेगा। दुष्यंत चौटाला ने बताया कि इस विधेयक के आने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों में अभूतपूर्व बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि सरपंच अब ग्रामीणों की भावना के अनुरूप ही विकास कार्यों को प्राथमिकता देंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें