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लोकसभा चुनाव: एचएसजीपीसी उड़ाएगी कांग्रेस की नींद

Tue, 18 Mar 2014 02:46 PM IST
गजेंद्र कुमार सिंह/अमर उजाला, सिरसा
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अब तक के चुनाव में एसवाईएल का मुद्दा अहम रहा है लेकिन इस मुद्दे पर इतनी राजनीति हुई कि लोगों ने इसे भुला ही दिया। पानी बिजली, सड़क मंहगाई और भ्रष्टाचार से अलग एक ओर मुद्दा है हरियाणा में अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का जिसे लेकर कांग्रेस की नींद उड़ी हुई है और भाजपा व इनेलो ने मौन साधा हुआ है।
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इस कमेटी की मांग करने वाले सिखों ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बहिष्कार का ऐलान किया हुआ है। हालांकि सांसद अशोक तंवर सिखों को लेकर सोनिया गांधी से मिले थे लेकिन स्थिति जस की तस है।

जब हरियाणा में अलग गुरुद्वारा कमेटी की मांग को लेकर आवाज उठने लगी तो पंजाब के सिख नेताओं ने धर्म का वास्ता देकर उन्हें चुप करवा दिया। उधर, एसजीपीसी पर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादली की पकड़ मजबूत होती गई जो हरियाणा के सिखों को नागवार गुजरा।
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पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966 की धारा 72 में कहा गया कि हरियाणा गठन के बाद पंजाब की तर्ज पर हरियाणा में कृषि विश्व विद्यालय, शैक्षणिक विश्व विद्यालय और अलग गुरुद्वारा कमेटी स्थापित की जाएगी। हरियाणा के गठन के बाद हिसार में कृषि विश्व विद्यालय और कुरुक्षेत्र में विवि खोला गया पर अलग गुरुद्वारा कमेटी की मांग आज तक पूरी नहीं हुई।

वर्ष 2004 और 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने इस मांग को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया। जब कांग्रेस ने बाद में चुप्पी साध ली तो फिर धरने प्रदर्शन शुरू हो गए।

कांग्रेस ने फूट डालो राज करो के तहत इस आंदोलन को चलाने वालों को अलग अलग करवा दिया। जगदीश झींडा और दीदार सिंह नलवी अलग हुए पर दोनों का उद्देश्य एक ही रहा।

झींडा ने बाद में अपने खून से प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अलग गुरुद्वारा कमेटी की मांग की। आखिर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर एक समिति का गठन तत्कालीन वित्तमंत्री हरमोहिंदर सिंह चट्ठा के नेतृत्व में किया।

प्रदेश के सिखों से शपथ पत्र मांगे गए। करीब साढे़ तीन लाख लोगों ने शपथपत्र दाखिल किए। चट्ठा ने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी पर सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने साफ कह दिया कि इस बारे में कानूनी राय ली जा रही है।

हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एडहॉक) के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रदेश के सिख स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं क्योकि कांग्रेस ने वादा खिलाफी की है। इस मांग को लेकर गत 12 फरवरी से सिरसा के सांसद डॉ. अशोक तंवर के आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया गया।

21 फरवरी से जरनैल सिंह बराड़ ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। जब उनकी तबीयत खराब हुई तो 26 फरवरी की रात को पुलिस उन्हें जबरन उठाकर अस्पताल ले गई लेकिन उनके स्थान पर स्वर्ण सिंह रतिया बैठ गए।

5 मार्च को चुनाव की घोषणा होते ही आचार संहिता को देखते हुए सिखों ने धरना स्थल पर जगदीश सिंह झींडा के नेतृत्व में सभा की, जिसमें फैसला किया गया कि लोकसभा चुनाव में सिख कांग्र्रेस का बहिष्कार करेंगे और कांग्रेसियों को गांव में घुसने नहीं देंगे। सिखों की चेतावनी से कांग्रेस की नींद उड़ गई।
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