हरियाणा सरकार की मोबाइल ऐप 'हरपथ' बीते तीन महीने से बंद पड़ी है। प्रदेश की जनता इस पर सड़कों के गड्ढों सहित अन्य शिकायतें दर्ज नहीं कर पा रही। सरकार ने नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) से हरपथ ऐप के साफ्टवेयर का मालिकाना हक अपने अधीन ले लिया है।
मगर, आईटी महकमे से ऐप को हरियाणा सर्वर पर चलाने की अनुमति अभी तक नहीं मिली है। जिससे पूरी प्रक्रिया लटक गई है। ऐप को इसरो के विंग एनआरएससी ने 2017 में डिजाइन किया था। बाकायदा हरियाणा सरकार ने इसके लिए एमओयू साइन किया था। तब से लेकर अक्टूबर-2019 तक इसका मालिकाना हक एनआरएससी के पास ही था। जिसे सरकार ने अब प्राप्त कर लिया है।
आईटी से अनुमति न मिलने पर सरकार ने ऐप को प्ले स्टोर से भी हटवा दिया है। चूंकि, मालिकाना हक तो सरकार के पास आ चुका है, लेकिन लोक निर्माण विभाग, भवन एवं सड़कें को अभी इस ऐप को हरियाणा सर्वर पर चलाने की सिक्योरिटी क्लीयरेंस आईटी विभाग से मिलनी बाकि है। इसलिए ऐप शुरू नहीं हो पा रहा।
25 नवंबर को लोक निर्माण विभाग की इस संबंध में बैठक भी हुई है। जिसमें समीक्षा के दौरान पाया गया कि ऐप चालू होने में अभी एक महीना और लगेगा। तब तक प्रदेश की जनता इसे प्रयोग नहीं कर पाएगी। आईटी विभाग से क्लीयरेंस के बाद ही ऐप दोबारा से प्ले स्टोर पर डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध होगा।
गूगल पर पुराना ऐप मौजूद मगर दर्ज नहीं होगी शिकायत
हरपथ का पुराना ऐप प्ले स्टोर पर तो नहीं मगर गूगल पर मौजूद है, आप उसे डाउनलोड तो कर सकते हैं, लेकिन उस पर शिकायत दर्ज नहीं होगी। चूंकि, ऐप अभी किसी भी सर्वर पर नहीं चल रहा है। हरियाणा निवासी सुरेश नैन, अंशुल सिंगला, मनीता कौशिक व दीपक ने बताया कि वे लंबे समय से सड़कों संबंधी समस्याएं अपलोड करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ऐप काम नहीं कर रहा। जिससे सड़कों की मरम्मत पूर्व की भांति नहीं हो रही।
ऐप में बदलाव की भी थी जरूरत : अरोड़ा
लोक निर्माण विभाग, भवन एवं सड़कें के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने बताया कि हरपथ ऐप में समय के हिसाब से बदलाव की जरूरत थी। जिसे एनआईसी ने कर लिया है। ऐप का मालिकाना हक अब सरकार केपास आ चुका है। ऐप नए रंग-रूप में जल्दी जनता की सेवा में सरकार समर्पित करेगी।
ऐसे काम करता था हरपथ ऐप
हरपथ ऐप को एंड्रायड फोन पर प्ले स्टोर से आने वाले समय में दोबारा डाउनलोड कर सकेंगे। इसके साफ्टवेयर के दो कंपोनेंट हैं। जिसमें एक ऐप और दूसरा वेब पोर्टल है। ऐप पर लगभग दो साल तक लोगों ने पूरे प्रदेश से सड़क पर पड़े गड्ढों या उखड़ी खड़क की फोटो भेजीं, जो संबंधित इंजीनियर, अधिशासी इंजीनियर को सड़क के नाम सहित चली जाती थी। यही रिकार्ड अधीक्षण अभियंता, चीफ इंजीनियर, डीसी, सीएम कार्यालय, इंजीनियर व अधिशासी इंजीनियर को वेब पोर्टल पर भी जाता था। इंजीनियर शिकायत दर्ज होने के दस दिन के भीतर पैच वर्क कर उसकी फोटो अपलोड करते थे।