नेशनल ग्रीन ट्रिब्यनूल (एनजीटी) की फटकार के बाद हरियाणा सरकार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 54 सहायक पर्यावरण इंजीनियर रखने जा रही है। इस संबंध में हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) ने भी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर आवेदन मांग लिए हैं। बोर्ड में यह पहली बार है जब इतनी संख्या में इंजीनियरों की भर्ती की जा रही है। आमतौर पर इंजीनियर डेपुटेशन पर ही लगाए जाते थे, लेकिन इस बार स्थायी भर्ती होगी।
हरियाणा के 22 जिलों में प्रदूषण की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में कुल 481 पोस्ट स्वीकृत है। इनमें से 303 पोस्टें खाली हैं और सिर्फ 178 अधिकारी ही नियुक्त हैं। अधिकारियों की कमी से बाकी स्टाफ पर वर्कलोड भी था। ऐसे में प्रदूषण को नियंत्रित संबंधी कार्य करने में काफी दिक्कते आ रही थीं। इसका खामियाजा प्रकृति और आम लोगों को भुगतना पड़ रहा था। इस संबंध में पर्यावरण कार्यकर्ता वरुण गुलाटी ने एनजीटी का रुख किया। उनका कहना था कि अधिकारियों की कमी की आड़ में प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर लगाम नहीं कसी जा रही थी। इससे भूमिगत पानी धीरे-धीरे प्रदूषित हो रहा है।
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एनजीटी ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया और बोर्ड को फटकार लगाते हुए अधिकारियों की कमी का कारण पूछा। हालांकि सरकार की ओर से कोई कारण नहीं बताया गया कि रिक्त पदों कोक्यों नहीं भरा जा रहा। सुनवाई के दौरान यह भी सवाल उठा कि बोर्ड की प्रयोगाशालाओं में विशेषज्ञों की भी कमी है और प्रयोगशालाएं भी अपग्रेड नहीं हो रही। सुनवाई के बाद एनजीटी ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए थे कि रिक्त पदों को भरने की प्रकिया तुरंत की जाए। इसके बाद हरियाणा सरकार ने पहले 45 सहायक पर्यावरण इंजीनियरों की पोस्ट निकाली। कुछ ही दिन बाद नौ और पोस्टों के लिए आवेदन मांग लिए। बताया जा रहा है कि अगले डेढ़ से दो महीने में भर्ती प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
शिकायतों पर नहीं होती थी कार्रवाई
पर्यावरण कार्यकर्ता वरुण गुलाटी ने बताया कि हरियाणा के कई जिलों में प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री की शिकायतें हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी। लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हर बार बोर्ड की ओर से स्टाफ की कमी का बहाना बता दिया जाता था। स्टाफ भर्ती की बात पर जवाब मिलता था कि सरकार इसके लिए परमिशन नहीं दे रही है। इस तरह के आश्वासनों से लगता था कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्टाफ की नियुक्ति के लिए गंभीर नहीं है। ऐसे में एनजीटी का रुख करना पड़ा। अच्छी बात है कि सरकार अब इन पोस्टों को भर रही है।
हर जगह यही हाल
प्रदेश पोस्टें खाली
झारखंड 271 237
बिहार 264 204
हरियाणा 481 303
मध्य प्रदेश 1228 781
उत्तराखंड 130 80