हरियाणा में 10वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के लिए पहली फरवरी से स्कूल खुल जाएंगे। बच्चों के लिए कोई रोस्टर लागू नहीं होगा। जिन्हें कोरोना रोधी वैक्सीन की एक डोज लग चुकी है, उन्हें ही स्कूलों में प्रवेश मिलेगा। मंगलवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल की मंजूरी के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया।
स्कूलों में बच्चों की हाजिरी अनिवार्य नहीं होगी। स्वेच्छा से बच्चे स्कूल आ सकेंगे। ऑनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी। नौवीं से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले 76 फीसदी बच्चे अभी तक कोरोना रोधी टीका लगवा चुके हैं। शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने बताया कि कोविड की ताजा स्थिति की समीक्षा व बच्चों के टीकाकरण की प्रगति जानने के बाद स्कूलों को खोलने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री से पूर्वानुमति ली गई। एक फरवरी आने में अभी समय है, तब तक 10 फीसदी से अधिक बच्चों को टीकाकरण होने की उम्मीद है। अभिभावक अपने बच्चों का टीकाकरण जरूर करवाएं। कोरोना मानकों का पालन करते हुए ही स्कूल खोले जाएंगे। सरकार पर स्कूल खोलने को लेकर कोई दबाव नहीं था। एक बेंच पर एक ही बच्चा बैठेगा। पीने का पानी घर से लाना होगा। बच्चों के स्कूल में प्रवेश व निकास द्वार अलग-अलग होंगे।
496828 विद्यार्थियों को टीका लगा
15 से 18 साल के बच्चों को तीन जनवरी से टीकाकरण शुरू हुआ था। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा सात से 12वीं तक 654490 विद्यार्थी हैं। जिनमें से 496828 विद्यार्थियों को टीका लग चुका है। महेंद्रगढ़ में सबसे अधिक 93, गुरुग्राम में 92, रेवाड़ी में 90 और यमुनानगर और फरीदाबाद में 85-85 फीसदी विद्यार्थियों को पहली डोज लग चुकी है।
88 फीसदी स्टाफ ने लगवाया टीका
स्कूल शिक्षा विभाग के 88 फीसदी स्टाफ को कोरोना रोधी टीका लग गया है। 10 हजार से अधिक शिक्षकों ने अभी तक अनेक कारणों से एक भी डोज नहीं लगवाई है। सरकार उन्हें लेकर जल्द निर्णय लेगी।