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वित्तमंत्री बोले- एक अप्रैल से लागू करेंगे GST, प्रस्ताव पर एक नजर

Fri, 21 Oct 2016 09:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु
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वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने एक अप्रैल से जीएसटी लागू करने का दावा किया। साथ ही वादा किया कि इससे राजस्व का नुकसान नहीं होगा। वित्तमंत्री अभिमन्यु ने बताया कि जीएसटी परिषद की ओर से राज्यों के लिए वर्ष 2015-16 के राजस्व संग्रहण को आधार मानकर आर्थिक विकास दर 14 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
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अगर किसी राज्य को राजस्व का नुकसान होता है तो केंद्र सरकार की ओर से पांच वर्षों तक इसकी भरपाई की जाएगी।  इससे एक राष्ट्र एक दर के साथ देश की आर्थिक उन्नति होगी। पिछले दिनों नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ जीएसटी को लेकर हुई बैठक में हुए महत्वपूर्ण निर्णयों पर बातचीत के दौरान कैप्टन अभिमन्यु ने यह जानकारी दी।

वित्त मंत्री ने बताया कि वैट के कारण भारत सरकार की ओर से केंद्रीय बिक्री कर(सीएसटी)के रूप में राज्यों को जाने वाली भरपाई के मामले वर्षों तक लंबित रहते थे, लेकिन जीएसटी के लागू होने से इसमें व्यापक बदलाव आएगा। जीएसटी काउंसिल(परिषद) एक वैधानिक निकाय होगी, जिसमें केंद्र या राज्य सरकारों का कोई एकाधिकार नहीं होगा।
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साल 2015-16 के दौरान हरियाणा को आबकारी राजस्व संग्रहण के रूप में 8000-9000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि वर्ष पेट्रोलियम उत्पादों सहित वैट से करीब 27 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। 
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चार श्रेणियों में जीएसटी लागू करने का प्रस्ताव

हरियाणा के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु
जीएसटी के ढांचे के बारे में वित्त मंत्री ने बताया कि इसमें जीरो टैक्स के अलावा करों की चार श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इसमें 3-9 प्रतिशत, 9-15 प्रतिशत, 15-21 प्रतिशत, 21-26 प्रतिशत का स्लैब का प्रस्ताव है। इसके तहत औसतन क्रमश: 6, 12, 18 और 26 प्रतिशत की दरें लागू करने का परिषद का सुझाव है।

नवंबर में काउंसिल की होंगी बैठकें
अभिमन्यु ने कहा कि राज्यों में एक अप्रैल, 2017 तक जीएसटी लागू करने के लिए समय सीमा तय की गई है। इसके लिए हरियाणा तैयार है। इससे मुद्रास्फीति की दर में कमी आएगी और महंगाई भी नियंत्रित रहेगी, क्योंकि इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीएसआई) से जोड़ा गया है।  नवंबर में जीएसटी काउंसिल की बैठकें नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में बुलाई जाएंगी। इसमें इससे संबंधित तमाम पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

कंसॉलिडेटेड फंड से भरपाई करने का प्रस्ताव
जीएसटी लागू होने के कारण तय मानक (14 फीसदी) से कम राजस्व अर्जित करने वाले राज्यों को नुकसान की भरपाई के लिए कंसॉलिडेट फंड या कॉपस बनाने का प्रस्ताव है। जीएसटी काउंसिल के प्रस्ताव के मुताबिक राजस्व नुकसान की भरपाई की जाएगी। पहले वैट के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता था, लेकिन जीएसटी से दो या तीन महीनों के अंदर ही फंड से भरपाई की जाएगी।

हरियाणा में औसत वृद्धि दर 12 फीसदी के करीब है। जबकि इसके लिए काउंसिल की ओर से 14 फीसदी की वृद्धि को सुनिश्चित किए जाने से प्रदेश को इसका फायदा मिलेगा। पंजाब को हरियाणा से भी अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
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