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किसानों का दर्द छलका- हाईवे किनारे बैठे हैं, हादसा हो जाए तो किस्मत, फसल बेचकर ही जाएंगे

Thu, 08 Oct 2020 12:17 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

  • फसल बेचने पहुंचे किसानों के दिन-रात बीत रहे हैं दुश्वारियों संग
  • दिन में हाईवे पर फसल सुखानी, रात को जागकर निगेहबानी करनी
  • अत्यधिक नमी की वजह से मंडियों में नहीं बिक रही किसानों की धान
  • फसल सुखाने के लिए मंडियों में जगह नहीं, हादसों खतरा अलग
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फसल सुखाने को हाईवे पर बैठे किसान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा की अनाज मंडियों में सरकार भले ही धान के खरीद कार्य में तेजी लाने का दावा कर रही है। मगर बहुत से किसान ऐसे हैं, जो आज नमी की वजह से मंडियों में अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं। हालात यह है कि मंडियों तक ट्रैक्टरों में धान लेकर पहुंचे किसान न तो अपनी फसल वापस ले जा सकते हैं और न ही मंडियों में धान सुखाने की जगह है।
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मंडियां पहले ही धान की ढेरियों और बोरियों से फुल हो चुकी हैं। मजबूरन ये किसान अब मंडियों से बाहर नेशनल व स्टेट हाईवे पर सड़कों किनारे अपनी धान बिछाकर उसे सुखाने में लगे हुए हैं। इन दिनों ऐसे किसानों के दिन और रात हाईवे की सड़कों पर ढेरों दुश्वारियों संग ही गुजर रहे हैं। सड़कों पर अपनी ट्रैक्टर-ट्रालियों समेत ये किसान दिन में तो हाईवे के किनारे सड़क पर अपनी धान को बिखेर देते हैं और धूप के सेंक से धान की नमी को कम करने की कोशिश करते हैं।

मगर चूंकि ये काम एक दिन का नहीं है। इसलिए रातभर भी अपनी फसल के पास बैठकर जागते हुए उसकी निगेहबानी करते हैं। ऐसी स्थिति में हाईवे किनारे बैठे इन किसानों को वाहनों से दुर्घटना का खतरा अलग बना रहता है। मगर इन किसानों का कहना है कि ऐसा करना उनकी मजबूरी है, क्योंकि सरकार तो नमी में राहत देने को तैयार नहीं है और ऐसे में वे अपनी फसल मंडियों के अलावा और कहां बेच सकते हैं।
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किसानों को उनकी बारी अनुसार एसएमएस के जरिए बुलाया जा रहा है। फसल खरीद मंडियों में तेज  हो गई है। मगर बहुत से किसानों की धान में नमी की मात्रा अधिक है और वे अपनी बारी से पहले पहुंच रहे हैं। इसलिए उनकी फसल नहीं बिक पा रही है। किसानों से लगातार अपनी फसल सुखाकर लाने का आग्रह किया जा रहा है। नमी की मात्रा में सशर्त दो प्रतिशत की छूट भी दी गई है। मगर उससे ज्यादा नमी वाला धान नहीं खरीदा जा सकता। इसलिए किसान भाई भी सरकार की मजबूरियां समझें और धान सुखाकर अपनी बारी पर ही मंडियों में फसल लाएं और एक ही दिन में फसल बेच घर जाएं।
- पीके दास, अतिरिक्त मुख्य सचिव, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग
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दिन में फसल बिछा उसे सुखाते हैं, रात में फसल की रखवाली करते हैं

प्रदेश के विभिन्न गांवों के लोग इसी तरह की दुश्वारियों से जूझ रहे हैं और दिन-रात अपनी फसलों के साथ हाइवे किनारे ही गुजार रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने हाईवे किनारे फसल सुखाने के लिए बैठे इन्हीं किसानों का दिन और रात दोनों समय उनकी परेशानियों का जायजा लिया और उनका दुखड़ा व मजबूरियां को जानने का प्रयास किया।

सड़क किनारे अपनी फसल लेकर बैठे डंधारी गांव के कश्मीर सिंह विर्क, अमीर सिंह व चुंगिया गांव के बलदेव सिंह व दर्शन सिंह संधू ने बताया कि वे अपनी फसल लेकर इस्माइलाबाद अनाज मंडी गए थे। मगर वहां उनकी फसल में नमी की मात्रा अधिक बता दी गई। वहां फसल गिराने के लिए जगह नहीं थी।

लिहाजा उन्हें अपनी फसल यहां हाईवे किनारे बिछाकर सुखानी पड़ रही है। अब वे अपनी फसल वापस खेत में तो ले जा नहीं सकते। इसलिए वे सड़क किनारे ही अपनी फसल सुखाने को मजबूर है। घोरखा गांव के किसान शंभूनाथ, जोदपुर गांव के लखविंद्र सिंह, जलबेड़ा के मेहर चंद और निर्मल सिंह व सौंटा के मामचंद ने बताया कि दिन भर धूप लगाकर उन्हें रात को यहीं सड़क किनारे ही बैठना पड़ता है, क्योंकि मंडी में फसल लेकर जाने की जगह ही नहीं है।

अपनी फसल की निगेहबानी के लिए उन्हें बारी-बारी रात जागकर काटनी पड़ती है। मंडियों में उनसे कहा जाता है कि तभी आना जब फसल की नमी कम हो जाए। वे कहते हैं कि यहां दिन-रात हाइवे किनारे बैठे हैं। वाहन सरपट दौड़ते रहते हैं। कोई हादसा हो जाए तो हमारी किस्मत, मगर जोखिम उठाकर अपनी फसल यहीं सुखाना फिलहाल हमारी मजबूरी बना हुआ है। वे लोग अपनी फसल मंडी में बेचकर ही घर जाएंगे, क्योंकि फसल बेचकर होने वाली आमदनी से ही उनके घर का गुजर-बसर चलना है।
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