फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा ग्राउंड रिपोर्ट: रेतीली धरती पर भाजपा का दुर्ग भेदना चाह रही कांग्रेस... निर्णायक सिद्ध होगी ये बेल्ट

Mon, 02 Sep 2024 09:37 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़

सार

कांग्रेस हरियाणा की रेतीली धरती पर भाजपा का दुर्ग भेदना चाह रही  है। एसवाईएल का पानी समेत ये बड़े मुद्दे हैं। कांग्रेस इसी को भुनाने में जुटी है। राव इंद्रजीत सिंह का दबदबा कायम है, चुनौती के लिए कैप्टन अजय यादव भी तैयार हैं। 
विज्ञापन
Haryana Election - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा की राजनीति में हमेशा से अहम दखल रखने वाली अहीरवाल बेल्ट इस बार भी निर्णायक सिद्ध होगी। इतिहास देखें तो किसी भी दल के लिए इस रेतीली धरती से ही सत्ता की राह निकलती है। यहां के मतदाता सत्ता के साथ चलने में यकीन रखते हैं। पार्टी चाहे कोई भी हो, लेकिन अहीरवाल के नेता राव इंद्रजीत सिंह जिस भी दल में गए, लोगों ने उनके फैसले पर फूल चढ़ाए हैं।
विज्ञापन


अहीरवाल ने 2005 से 2014 तक खुलकर कांग्रेस का साथ दिया और सत्ता में भागीदारी की। 2014 से 2024 तक भाजपा का दामन थामा। मौजूदा समय में अहीरवाल भाजपा का गढ़ है और कांग्रेस इसमें सेंध लगाने की कोशिश में है। गुरुग्राम, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले की इस पूरी बेल्ट में 11 विधानसभा सीटें हैं। 

2019 को लोकसभा चुनाव में भाजपा को इन सभी सीटों पर बढ़त मिली थी। छह माह बाद हुए विधानसभा चुनाव में 8 विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी। यहां की 11 में से 8 सीटें भाजपा और 2 कांग्रेस के पास हैं। एक सीट पर निर्दलीय का कब्जा है। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव की बात करें तो जहां कांग्रेस को प्रदेश में पांच सीटें मिली और प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन इस बेल्ट में कांग्रेस इतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई, बल्कि अधिकतर सीटों पर सत्ताधारी पार्टी भाजपा को जीत मिली है। 
विज्ञापन


हालांकि, पिछली बार के मुकाबले वोटों का अंतर घटा है। भाजपा के घटते जनाधार को देखते हुए ही कांग्रेस को इस बेल्ट में आस जगी है। 2014 के चुनाव से पहले ये इलाका कांग्रेस का गढ़ रहा, लेकिन 2014 में मोदी लहर के बाद हुए तीन चुनावों में अहीरवाल ने एकतरफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ दिया। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो अहीरवाल ऐसा इलाका है, जिसकी बदलौत ही दोनों बार भाजपा प्रदेश में सत्तासीन हुई।
Trending Videos

इस बेल्ट में भाजपा के पास राव इंद्रजीत सिंह के अलावा सुधा यादव, पूर्व मंत्री रामबिलास शर्मा, पूर्व मंत्री ओपी यादव, मंत्री डॉ. बनवारी लाल और मंत्री अभय यादव शामिल हैं। वहीं, कांग्रेस पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव, राव दान सिंह और राज बब्बर के सहारे है। सेना में इस क्षेत्र के काफी संख्या में लोग हैं और युवाओं का सपना भी सेना में जाने का है। कांग्रेस अग्निवीर योजना को मुद्दा बना रही है। यहां सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस में मुकाबला है। जजपा, इनेलो और आप के लिए यहां राहें काफी कठिन हैं।
 

राव के लिए भाजपा नेता ही चुनौती
राव इंद्रजीत सिंह की पकड़ इस इलाके पर कम हुई है। लोकसभा चुनाव के परिणाम इसका उदाहरण हैं। खासकर राव के लिए भाजपा के नेता ही बड़ी चुनौती हैं। राव इस बार भी अपनी पसंद के नेताओं को टिकट दिलाने पर अड़े हैं, जबकि भाजपा अनुशासन और संगठन को तवज्जो देती आई है। राव के विरोधियों में पूर्व मंत्री राव नरबीर, रणधीर कापड़ीवास, सुधा यादव, अरविंद यादव, अभय यादव समेत अन्य नेता शामिल हैं। 

ये नेता खुद टिकट चाहते हैं या फिर अपने समर्थकों को टिकट दिलाना चाहते हैं, लेकिन राव की पसंद इसमें आड़े आ रही है। इस बार राव इंद्रजीत की बेटी आरती राव भी मैदान में उतरने को तैयार हैं। इसलिए यहां पर टिकट वितरण पर भी काफी कुछ निर्भर करेगा। दूसरी तरफ, इस बार के लोकसभा चुनाव में रेवाड़ी जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर मतदाताओं का मूड जरूर कुछ बदला दिखा। 

 

यहां की दो विधानसभा क्षेत्रों रेवाड़ी और बावल में भाजपा को लीड मिली है। कोसली विधानसभा सीट पर भाजपा मात्र दो वोटों से पिछड़ी थी। इसी तरह गुरुग्राम जिले की चारों सीटों पर भाजपा ने परचम फहराया था। हालांकि सोहना सीट पर भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत को सबसे कम सिर्फ 6111 वोटों की लीड मिली थी। बादशाहपुर और गुरुग्राम विधानसभा सीट पर लीड का अंतर 1 लाख को पार कर गया।

 

एसवाईएल का पानी, अग्निवीर, बढ़ता प्रदूषण और एम्स निर्माण बड़े मुद्दे
कई दशक बीतने के बाद भी यहां पानी का मुद्दा आज भी हल नहीं हुआ है। जमीन रेतीली है और खेतों को नहरी पानी नहीं मिलता। इसके चलते यहां पर फसलों का उत्पादन अच्छा नहीं हो पाता। यहां पर गेहूं, कपास, बाजरा और सरसों ही प्रमुख फसलें हैं। एसवाईएल के पानी का आज भी यहां के लोगों को इंतजार है। 

 

हर चुनाव में एसवाईएल का पानी चुनावी मुद्दा बनता है। नेता बड़े-बड़े दावे करते हैं और हार-जीत के बाद यह मुद्दा खत्म हो जाता है। इसके अलावा यहां से युवाओं में सेना में जाने का क्रेज है, लेकिन अग्निवीर योजना आने से यहां के मतदाताओं में खासा रोष है।

वहीं, उद्योगों के चलते बढ़ता प्रदूषण भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। एम्स के लिए जमीन मिल गई है और शिलान्यास भी हो गया है, लेकिन इसकी नींव रखने में ही नौ साल से अधिक का समय बीत गया। इससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

सीएम के दो ओएसडी तलाश रहे सियासी जमीन
दस साल तक सरकार में बड़े ओहदों पर रहे दो युवा नेता भी अहीरवाल में अपना सियासी सफर शुरू करने की कोशिश में हैं। मनोहर लाल के पूर्व ओएसडी जवाहर यादव बादशाहपुर से टिकट चाह रहे हैं और वह लगातार इस इलाके में सक्रिय हैं। हालांकि, उनके लिए टिकट की राह इतनी आसान नहीं हैं।

राव नरबीर उनकी राह रोके हुए हैं। इसी प्रकार मनोहर लाल के पीए और बाद में ओएसडी रहे अभिमन्यु भी कोसली से भाजपा के टिकट की जुगत में हैं। हालांकि, यहां उनकी जमीनी स्तर पर पकड़ नहीं है, लेकिन मनोहर लाल के दम पर वह ताल ठोकने की कोशिश में हैं। टिकट की राह इनके लिए भी काफी कठिन है।
 

11 में से आठ सीटें भाजपा के पास
विधानसभा सीट दल
रेवाड़ी कांग्रेस
बावल भाजपा
कोसली भाजपा
नारनौल भाजपा
महेंद्रगढ़ कांग्रेस
नांगल चौधरी भाजपा
अटेली भाजपा
गुरुग्राम भाजपा
बादशाहपुर निर्दलीय
पटौदी भाजपा
सोहना भाजपा

पूरी बेल्ट में अहीर मतदाता प्रभावी
इस पूरी बेल्ट की सभी 11 विधानसभा सीटों पर यादव यानी अहीर मतदाता प्रभावी हैं। इसे अहीर बहुल बेल्ट भी कहा जाता है। एक-एक सीट पर किसी भी प्रत्याशी की हार और जीत का फैसला यादव मतदाताओं के हाथ में है। इनके अलावा यहां पर जाट, सैनी, वैश्य, गुर्जर, ओबीसी और अनुसूचित जाति के साथ ब्राह्मण समाज के मतदाताओं की संख्या खासी है।

 
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें