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सीएम के फैसले पर टिकीं निगाहें: डीजीपी मनोज यादव का हरियाणा से मोहभंग, आईबी में जाने की इजाजत मांगी

Wed, 23 Jun 2021 12:10 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्रदेश सरकार से डीजीपी ने यह अनुमति उस समय मांगी है, जब आईजी वाई पूर्ण कुमार के साथ उनका लंबे अरसे से विवाद चला आ रहा है।
 
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डीजीपी मनोज यादव। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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मनोज यादव का अब हरियाणा के पुलिस महानिदेशक पद से मोहभंग हो चुका है। अब वे आईबी में जाना चाहते हैं, लिहाजा उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिख कर अनुमति मांगी है। गृह सचिव को लिखे पत्र में उन्होंने केंद्र सरकार में अतिरिक्त निदेशक, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पद पर वापस लौटने की इच्छा जताई है। उन्होंने प्रदेश में अब तक दी सेवाओं पर ट्वीट भी किया है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि डीजीपी जाना चाहते हैं तो विचार कर फैसला लेंगे।

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डीजीपी इन दिनों आईजी अंबाला वाई पूर्ण कुमार के साथ विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। प्रदेश में नियुक्ति के बाद से ही उनका विवादों से नाता रहा है। गृह मंत्री अनिल विज, आईपीएस श्रीकांत जाधव के अलावा अन्य अधिकारियों के साथ भी उनके विवाद रहे। दो वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर मनोज यादव सीधे विज के निशाने पर आ गए थे। बावजूद इसके उन्हें अगले आदेश तक डीजीपी के पद पर सेवा विस्तार मिला था। विज के आदेश न मानने पर भी वह सुर्खियों में रहे।

डीजीपी मनोज यादव का ट्वीट
पिछले 28 महीनों से मैंने हरियाणा के नागरिकों की सेवा में डीजीपी के रूप में क्षमता के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है। अब आईबी वापस बुला रहा है। मैं कॅरियर और पारिवारिक आवश्यकताओं के कारण केंद्र सरकार में वापस जाना चाहता हूं। मैंने हरियाणा सरकार से वापस जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

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यूपीएससी को भेजा जाएगा तीन नामों का पैनल: सीएम

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि डीजीपी के आग्रह पर विचार किया जाएगा। यूपीएससी को नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए तीन आईपीएस के नामों का पैनल भेजेंगे। हालांकि, इस पर अभी निर्णय नहीं लिया है। गृहमंत्री व डीजीपी के विवाद पर उन्होंने कहा कि हमारे यहां सब मिलकर काम करते हैं।

पूर्ण कुमार के विवाद में रिपोर्ट तलब
आईजी वाई पूर्ण कुमार के साथ डीजीपी के विवाद में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने डीजीपी मनोज यादव, वर्तमान आईजी अंबाला और एसपी अंबाला को पत्र लिखकर अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही यह भी पूछा है कि अभी तक आईजी की शिकायत पर केस दर्ज क्यों नहीं हुआ।

21 फरवरी 2019 को बने डीजीपी
आईपीएस मनोज यादव 21 फरवरी 2019 को हरियाणा के डीजीपी बने। वह आईबी से 2 वर्ष की अवधि के लिए हरियाणा में डीजीपी पद के लिए प्रतिनियुक्ति पर आए। प्रदेश सरकार की सिफारिश पर 20 फरवरी 2021 के बाद उनका कार्यकाल एक वर्ष की अवधि या अगले आदेश तक बढ़ाया गया। अभी उनका कार्यकाल अगले वर्ष पूरा होता लेकिन उन्होंने उससे पहले ही आईबी में जाने की अनुमति मांग ली। वह आईबी में अतिरिक्त निदेशक पद के लिए केंद्र सरकार की तरफ से पहले ही अधिकृत किए जा चुके हैं। 1988 बैच के आईपीएस मनोज यादव को वर्ष 2003 में इंटेलिजेंस ब्यूरो में संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात किया था।
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वाई पूर्ण कुमार के साथ डीजीपी ऐसे विवाद में फंसे

अगस्त 2020 को सार्वजनिक अवकाश के दिन आईजी वाई पूर्ण कुमार के थाने में बने मंदिर में जाने पर डीजीपी की तरफ से पूछे सवाल से सारा विवाद शुरू हुआ। आईजी ने इस मामले में डीजीपी पर एफआईआर दर्ज करने को लेकर 19 मई को एसपी अंबाला को शिकायत दी। 

कार्रवाई न होने पर उन्होंने इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार के आला महकमों को पत्र लिख कर डीजीपी पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि एससी/एसटी एक्ट के तहत डीजीपी पर एफआईआर दर्ज की जाए। डीजीपी इस मामले में गृह मंत्री अनिल विज से भी मिले लेकिन उन्होंने अफसरशाही का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया।

अंबाला एसपी को यह दी है शिकायत
शिकायत में वाई पूर्ण कुमार ने कहा है कि 3 अगस्त 2020 को सार्वजनिक अवकाश था, वे शहजादपुर थाने में बने मंदिर में गए थे। डीजीपी ने उनसे पूछा था कि मंदिर स्थापित करने से पहले सरकार से पूछा गया है क्या? उन्होंने कहा कि मंदिर उनकी नियुक्ति से पहले का है। डीजीपी उन्हें सार्वजनिक अवकाश के दिन पूजा करने से नहीं रोक सकते।
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