हरियाणा विधानसभा के आखिरी सत्र के आखिरी दिन सीएम मनोहर लाल ने विपक्षी विधायकों के सवालों के जवाब देते-देते भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें ही आइना दिखा दिया। सीएम मनोहर लाल ने खुद को आगे कर साफ कहा कि प्रदेश में सरकार ने न तो भ्रष्टाचार किया है और न ही इसे बर्दाश्त किया है।
सीएम ने कहा कि कभी मुझ पर भी कोई बात आ जाए तो मुझे भी उठाकर अंदर कर देना। लेकिन सरकार भ्रष्टाचार के मामले में सरकार ने जीरो टालरेंस नीति अपनाई है और उसी पर आज भी कायम है। सीएम ने कहा कि कांग्रेस खुद बता दे कि उनके कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार के मामलों में उन्होंने कितनी जांच बिठाई और क्या कार्रवाई की।
लेकिन हमारी सरकार ने आते ही इस लाइन पर लगातार काम किया कि ‘न खाएंगे-न खाने देंगे, पिछला खाया-पीया भी निकाल देंगे।’ अपने 1 घंटे 39 मिनट के वक्तव्य में सीएम ने जहां विपक्ष के सभी सवालों का साफगोई और तथ्यपरक जवाब दिया, वहीं जब उन्होंने पूर्व सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार मामलों का चैप्टर शुरू किया तो कांग्रेसी विधायकों में खलबली मच गई। कांग्रेस के अधिकतर विधायक तो सीएम के वक्तव्य से पहले ही सदन छोड़कर जा चुके थे। कांग्रेस के सिर्फ चार विधायक रघुबीर कादियान, करण दलाल, गीता भुक्कल व आनंद सिंह दांगी ही सदन में मौजूद रहे।
लेकिन सीएम ने जब कांग्रेस काल में घोटालों की तार छेड़ी तो विधायक रघुबीर कादियान यह कहते हुए वॉकआउट कर गए कि चूंकि विधानसभा में सीएम के इस कार्यकाल का यह आखिरी वक्तव्य है, इसलिए उन्हें कोई तल्खी और तनाव वाली बात नहीं कहनी चाहिए। लेकिन सीएम ने अपना वक्तव्य जारी रखा। सीएम ने कहा कि चाहे बात व्यवस्था परिवर्तन की हो या विकास की पूर्व कांग्रेस के दस साल वाली सरकार पर हमारी सरकार के पांच साल भारी है। जबकि भ्रष्टाचार के मामले में भी यही बात फिट बैठती है।
सीएम ने यूं दिखाया आइना
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि हमने ओवरलोडिंग घोटाले, किलोमीटर स्कीम में टेंडर घोटाले, पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से चलते आ रहे पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति घोटाले, फर्जी टिकट घोटाला व महिला एवं बाल विकास विभाग में पोषण अभियान के तहत आउटसोर्सिंग से हुई भर्ती में अनियमिताओं समेत पांच केसों की जांच विजिलेंस को सौंपी है। सीएम ने कहा कि ‘हम तो फाइलें सूंघते रहते हैं, कई भ्रष्टाचार मिल जाए तो खोदकर निकालते हैं।’
उसके बाद सीएम ने कांग्रेसियों की घेराबंदी करते उनसे सवाल दागा कि अब कांग्रेस बता दे कि उनके कार्यकाल में हुए नीलम यूनिवर्सिटी कैथल घोटाला, पात्र किसानों को मुआवजा राशि देने संबंधी घोटाला, उनके कार्यकाल में ही शुरू हुआ पोस्ट मैट्रिक घोटाला, फर्जी ड्रिप सिंचाई घोटाला, झज्जर में गलत तरीके से पाइप बिछाकर फर्जी सब्सिडी घोटाला, मानेसर घोटाला, एजेएल घोटाला, पंचकूला प्लाट आवंटन घोटाले समेत अन्य फर्जीवाड़ों में उन्होंने क्या किया। इनमें से चार घोटालों की जांच तो अब सीबीआई द्वारा करवाई जा रही है।
खाद घोटाले में घिरे करण दलाल
अपने वक्तव्य में सीएम ने कांग्रेस के विधायक करण दलाल को भी अचानक झटका दिया। सीएम ने करण दलाल के उनके वन मंत्री कार्यकाल के दौरान किए गए खाद घोटाले में उन्हें अचानक घेर दिया। सीएम ने कहा कि इस खाद घोटाले में विधायक करण दलाल पर अभियोग भी चलाया गया। जांच विजिलेंस कर रही थी। लेकिन कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2010 में कोर्ट में चल रहे इस अभियोग को ही वापस ले लिया था।
सीएम के इस खुलासे के बाद भाजपा विधायकों ने करण दलाल पर कड़ी टिप्पणी करनी शुरू कर दी। जिसके बाद करण दलाल खड़े हुए और उन्होंने कहा कि इस मामले में आज तक उन पर आरोप साबित नहीं हुए हैं। इस पर वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि आरोप साबित कैसे हो सकते थे, मामला जब कोर्ट में चल रहा था तो आपकी सरकार ने अभियोग ही वापस ले लिया। इस केस को सिरे तो चढ़ने दिया होता, तो सबकुछ साफ हो जाता।