हरियाणा के सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा (प्रबंधन) विधेयक का भाजपा और इनेलो द्वारा विरोध करने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि दोनों दल इस मुद्दे पर राजनीति करने का प्रयास कर रहे हैं।
भाजपा इस मुद्दे पर दोहरी नीति अपना रही है। सीएम हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान प्रेस दीर्घा में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में विधायक निर्मल सिंह अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के गठन के लिए एक निजी बिल लाए थे। उस समय भाजपा के दोनों विधायकों नरेश मलिक और राम कुमार गौतम ने उसका समर्थन किया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में अलग कमेटी की व्यवस्था है
सदन में जब हरियाणा सिख गुरुद्वारा (प्रबंधन) विधेयक पारित हो रहा था, तो इनेलो के साथ भाजपा के विधायक भी विधेयक के विरोध में वॉकआउट कर गए।
कमेटी के गठन पर कानूनी राय लेने पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में सीएम ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में राज्य सरकार द्वारा राज्य में अलग से कमेटी गठित करने की व्यवस्था दी हुई है। बिल को राष्ट्रपति के संदर्भ के लिए भेजने की भी आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि राज्यपाल ही इसके लिए सशक्त हैं।
राज्यपाल के हस्ताक्षर होते ही प्रभावी होगा विधेयक
उन्होंने कहा कि जब विधेयक पर हरियाणा के राज्यपाल के हस्ताक्षर हो जाएंगे, तभी से यह प्रभावी होगा। तब तक गुरुद्वारा प्रबंधन के लिए 41 सदस्यीय तदर्थ कमेटी गठित की जाएगी।
इसमें महिलाओं, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग का भी प्रतिनिधित्व होगा। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एडहॉक) के अध्यक्ष जगदीश झींडा, दीदार सिंह नलवी और अन्य जत्थेदारों ने हरियाणा सिख गुरूद्वारा (प्रबंधन) विधेयक पारित करवाने के लिए सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का आभार जताया।