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Civic Election: जीत का अंतर तय करेगा सैनी सरकार के मंत्रियों का सियासी कद, परिणामों पर टिकी हैं सभी की नजरें

Tue, 12 May 2026 11:19 AM IST
Sharukh Khan आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा सरकार के मंत्रियों का सियासी कद निकाय चुनाव में जीत का अंतर तय करेगा। निकाय चुनाव में मार्जिन के लिए संगठन में पकड़ और भविष्य की जिम्मेदारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
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सीएम नायब सैनी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा में सातों निकाय चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो चुके हैं और अब सभी की नजरें 13 मई को आने वाले परिणामों पर टिकी हैं। चुनावी रुझानों को लेकर भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल है। पार्टी के भीतर अब चर्चा केवल जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी हो रही है कि कौन सा निकाय भाजपा कितने मतों के अंतर से जीतती है।
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पार्टी के अंदर जीत के मार्जिन को केवल चुनावी आंकड़ा नहीं, बल्कि मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक पकड़, संगठन क्षमता और भविष्य की जिम्मेदारियों का संकेत माना जा रहा है। निकाय चुनाव को लेकर भाजपा ने काफी पहले से रणनीति तैयार कर ली थी। 

चुनाव घोषणा से करीब तीन महीने पहले ही पार्टी ने हरियाणा सरकार के सात मंत्रियों को सात निकायों की जिम्मेदारी सौंप दी थी। इसके तहत विपुल गोयल को पंचकूला नगर निगम, कृष्ण लाल पंवार को सोनीपत, रणबीर गंगवा को अंबाला नगर निगम, कृष्ण बेदी को उकलाना नगर परिषद, डॉ. अरविंद शर्मा को सांपला, गौरव गौतम को रेवाड़ी नगर परिषद और राजेश नागर को धारूहेड़ा नगर पालिका का प्रभारी बनाया गया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निकाय चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों और विकास कार्यों पर जनता की राय नहीं दर्शाते, बल्कि यह राज्य सरकार के कामकाज की भी परीक्षा माने जाते हैं। सैनी सरकार के दो वर्ष पूरे होने वाले हैं और ऐसे में यह चुनाव सरकार के प्रदर्शन का राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है। 

विश्लेषकों के अनुसार, यदि संबंधित निकायों में भाजपा को बड़े अंतर से जीत मिलती है तो संबंधित मंत्रियों का संगठन और हाईकमान में कद बढ़ सकता है। वहीं, अपेक्षाकृत कम मार्जिन या कमजोर प्रदर्शन को भविष्य की रणनीति में सुधार की जरूरत के रूप में देखा जाएगा। 

भाजपा नेतृत्व ने मंत्रियों को केवल चुनाव प्रचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उम्मीदवार चयन, चुनावी प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर माहौल निर्माण की जिम्मेदारी भी सौंपी थी। पार्टी की रणनीति थी कि मंत्री अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों, नगर निकाय योजनाओं और जनसंपर्क के जरिए भाजपा के पक्ष में मजबूत माहौल तैयार करें।

 

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 13 मई को परिणाम आने के बाद केवल विजेता और पराजित उम्मीदवार ही चर्चा में नहीं होंगे, बल्कि जीत और हार का अंतर भी नेताओं की राजनीतिक स्थिति तय करेगा। इस चुनाव में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली की साख भी दांव पर मानी जा रही है।
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11:30 बजे तक साफ हो जाएगी तस्वीर
सात निकायों के चुनाव परिणाम 13 मई को घोषित किए जाएंगे। सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू होगी और 11 से 11.30 बजे तक तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। दोपहर 12 बजे तक अधिकांश परिणाम आने की संभावना है। चुनाव आयोग ने मतगणना की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और अधिकारियों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है।
 
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