पुनर्वास के लिए वर्तमान में 20 वर्ष की अवधि को जहां किसान चाहेंगे, कम करके15 वर्ष कर दिया जाएगा। 1828 एमएलडी की शोधन क्षमता वाले 207 एसटीपी से उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग करने के लिए 1098.25 करोड़ रुपये की लागत की एक परियोजना मंजूर की गई है। इससे यमुना नदी एवं घग्गर नदी में गिरने वाले गंदे पानी के बहाव को रोका जा सकेगा ।
नहरी पानी के भंडारण के लिए औसतन 10 फीट की गहराई वाले लगभग 160 टैंकों का निर्माण किया जाएगा, जिनकी भंडारण क्षमता 16 मिलियन घन फुट होगी। इस प्रकार कुल प्रदेश में लगभग 80 हजार एकड़ भूमि पर सूक्ष्म सिंचाई की सुविधा शुरू की जाएगी।
विभिन्न नहरों पर रियल टाइम डिस्चार्ज डाटा प्राप्त करने के लिए चार करोड़ रुपये की लागत से स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक गेज लगाए जा रहे हैं। यह व्यवस्था आउट्लेटस से अतिरिक्त पानी के इस्तेमाल व चोरी का पता लगाने में सहायक होगी। इसके अलावा, स्मार्ट मोबाइल एप्लीकेशन भी तैयार किया जा रहा है, जिससे किसानों को नहरों के रोटेशनल प्रोग्राम तथा अंतिम छोर पर पानी की उपलब्धता के बारे में जानकारी मिल सकेगी।
गैर-मानसून के दौरान 763.13 हेक्टेयर मीटर की शुद्ध जल भंडारण क्षमता के आदिबद्री बांध के निर्माण की एक परियोजना सरकार के विचाराधीन है। हरियाणा सरकार को समझौता ज्ञापन के तहत ऊपरी यमुना नदी बोर्ड को 458.42 करोड़ रुपये की प्रारम्भिक राशि 5 सालों में चरणबद्ध रूप में देनी है ताकि इन बांधों का निर्माण हो सके।
तदनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 में 100 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव किया गया है। हरियाणा राज्य में आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करने के लिए हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की नहरों व नालों के जर्जर व पुराने पुलों के पुनर्वास व पुनर्निर्माण के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में 150 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव है ।