कार्यकारी अभियंता, पंचायती राज को भी जिला परिषद के अधीन किया जाएगा। जिला परिषदों को वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकार का टैक्स लगाने की छूट दी जाएगी। सरकार केवल इन टैक्सों की न्यूनतम एवं अधिकतम दर निर्धारित करेगी। जिला परिषदों को हर वर्ष कम से कम 20 करोड़ से 25 करोड़ तक की अनुदान राशि उपलब्ध करवाने का भी निर्णय लिया गया है।
वर्ष 2020-21 से महाग्रामों में अप्रिय घटनाओं की रोकथाम के लिए एलईडी स्ट्रीट लाईट लगवाई जाएंगी। महाग्रामों में समाजिक सुरक्षा एवं विकास कार्यों व स्वच्छता की निगरानी को सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। जिन ग्राम पंचायतों के पास अपने आय स्रोतों से एक करोड़ रुपए से अधिक की जमा राशि उपलब्ध है उनमें भी एलईडी स्ट्रीट लाईट लगवाई जाएंगी।
हरियाणा ग्रामीण विकास प्राधिकरण को 50 करोड़ रुपये की राशि वित्त वर्ष 2020-21 में उपलब्ध करवाई जाएगी, जिन गांवों के लाल डोरे के भीतर के नक्शे तैयार हो जाएंगे, उन गांवों को एचआरडीए प्राथमिकता देगा। ग्राम पंचायतों की वार्षिक आय 350 करोड़ रुपये से बढ़कर 500 करोड़ रुपए तक हो सके, इसके कदम उठाएंगे।
पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी स्थानीय निकायों को राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर दी जाने वाली अनुदान राशि को समय पर दिया जाना सुनिश्चित करेंगे। ऐसे स्थानीय निकाय, जो कि वित्तीय तौर पर सुदृढ़ नहीं है उनको विकास कार्यों के लिए समान अनुदान दिया जाएगा बजट में केंद्रीय तथा राज्य वित्त आयोग, अन्य स्रोतों की सहायता को मिलाकर हर विधानसभा क्षेत्र में 80 करोड़ रुपये की दर से 7200 करोड़ रुपये वार्षिक धनराशि उपलब्ध करवाने का प्रावधान रखा गया है।