हैपनिंग हरियाणा इनवेस्टर्स समिट के सफल आयोजन से उत्साहित हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के लिए अब वित्त वर्ष 2016-17 का बजट सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने है। पिछले साल घाटे का बजट पेश करने के बाद वित्त मंत्री अब तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था को घाटे से उबार नहीं पाए हैं। जाते हुए वित्त वर्ष के अंतिम दो महीनों में जाट आरक्षण आंदोलन के रूप में प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने पर हुई चोट ने सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त बोझ डाला है।
पुनर्वास के लिए पीड़ितों को वैट, बिजली-पानी के बिल में रियायत, मुआवजा राशि अगले वित्त वर्ष में भी सरकारी खजाने पर बोझ डालेंगे। जाहिर है, प्रदेश के बदले हुए मौजूदा हालात में ऐसे बजट की दरकार रहेगी, जो प्रदेश के विकास के साथ ही आम लोगों को यह विश्वास भी दिलाए कि सरकार गंभीरता से काम कर रही है।
कैप्टन अभिमन्यु की ओर से पेश किए गए वर्ष 2015-16 के बजट पर सरसरी नजर डाली जाए तो करीब 5 हजार करोड़ के घाटे का बजट पेश करते हुए यह मान लिया गया था कि प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ भी 81836 करोड़ से बढ़कर 98843 करोड़ हो जाएगा। चूंकि यह प्रदेश की भाजपा सरकार का पहला बजट था, इसलिए वित्त मंत्री ने कोई नया कर नहीं लगाते हुए और कर्ज के बोझ को दरकिनार करते हुए ढांचागत संरचना और सामाजिक क्षेत्र को पैसा बांटने में कोई कंजूसी नहीं दिखाई थी।
ढांचागत संरचना में उन्होंने 17331.08 करोड़ रुपये का प्रावधान करते हुए बीते वर्ष के मुकाबले 7.65 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। सामाजिक क्षेत्र के लिए भी बजट में बीते वर्ष के मुकाबले 16.93 प्रतिशत ज्यादा राशि दी गई थी। फिर भी उन्होंने योजनागत बजट में कम और गैर योजनागत बजट में ज्यादा राशि देकर अपनी नई सरकार को लोकप्रिय बनाने के लिए खर्च की व्यवस्था कर दी थी। बजट बढ़ोतरी के इस ट्रेंड को कैप्टन अभिमन्यु अपने नए बजट में कायम रख पाएंगे, इस पर संशय है।
हालांकि, कुछ दिन पहले एक प्रेस कांफ्रेंस में जब कैप्टन अभिमन्यु से पूछा गया कि क्या अगले बजट में योजनागत और गैर योजनागत मदों में पैसे की वितरण में बदलाव आएगा, वित्त मंत्री का कहना था कि वर्ष 2015-16 का बजट केंद्रीय बजट के ट्रेंड को देखते हुए बनाया गया था। नए बजट में इसमें बदलाव आ सकता है। वित्त मंत्री से इस कथन से उम्मीद की जानी चाहिए कि नया बजट योजनागत राशि में बढ़ोतरी के साथ विकास में तेजी लाने वाला साबित होगा।
इस बीच, प्रदेश सरकार ने अति उदारता दिखाते हुए डिस्कॉम का 25950 करोड़ रुपये कर्ज भी अपने सिर ले लिया है। इस फैसले से प्रदेश के खजाने पर दोहरा बोझ बढ़ने की आशंका है क्योंकि इतनी बड़ी रकम का कर्ज चुकाने के लिए सरकार कर्ज लेगी, जिसके ब्याज की रकम भी मामूली नहीं होगी। इसके अलावा डिस्कॉम को दी जाने वाली करीब करोड़ों की सब्सिडी भी खजाने से ही जानी है।
आरक्षण आंदोलन से उपजे हालात और डिस्कॉम के लिए धन की व्यवस्था के साथ ही कैप्टन अभिमन्यु कई अन्य मोर्चों पर भी खर्च की व्यवस्था करनी होगी। इसे देखते हुए प्रदेश की आय बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री के पास नए कर लगाने के अलावा फिलहाल कोई विकल्प नहीं है क्योंकि निवेश को बढ़ावा देने के लिए साल भर किए गए प्रयास भी अब तक मूर्तरूप नहीं ले पाए हैं।