हरियाणा के सरकारी और निजी स्कूलों में नौनिहालों का बचपन बस्ते के बोझ तले दबकर नहीं रह जाएगा। बीजेपी सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय, एमएचआरडी ने स्कूल के बच्चों के बस्ते का वजन निर्धारित कर दिया है। पहली से बारहवीं कक्षा तक के बच्चों पर स्कूल उससे अधिक वजन नहीं लाद पाएंगे। प्रत्येक कक्षा और बच्चे की उम्र के हिसाब से बस्ते का वजन तय किया गया है।
आमतौर पर छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों की पीठ पर उम्र और शरीर के वजन से ज्यादा बस्ते का वजन होता है, जिसे ढोते-ढोते बच्चे पढ़ाई से तो ऊबते ही हैं, उनका शारीरिक विकास भी प्रभावित होता है। इसे देखते हुए मानव संसाधान विकास मंत्रालय ने अक्टूबर में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तय गाइडलाइन लागू करने के निर्देश दिए थे। हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग ने उन पर अमल शुरू कर दिया है। विभाग पहले ही 200 से अधिक स्कूलों को बैग फ्री भी बना चुका है।
एमएचआरडी ने कक्षा पहली और दूसरी में पढ़ने वाले बच्चों के बस्ते का वजन डेढ़ किलो तक होगा, जबकि तीसरी से पांचवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों के बस्ते का वजन 2 से 3 किलो निर्धारित किया गया है। इसी तरह कक्षा छठी से आठवीं तक पढ़ाई करने वाले बच्चों के बस्ते का वजन चार किलो से अधिक नहीं होगा। इतना ही नहीं, कक्षा आठवीं से नौंवी तक बस्ते का वजन साढ़े चार किलो तक रखा गया है। कक्षा दसवीं से बारहवीं में पढ़ने वाले बच्चों के बस्ते का वजन पांच किलो से अधिक नहीं होगा।
पहली-दूसरी कक्षा के बच्चों को नहीं दिया जाएगा होमवर्क
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार व प्रदेश महामंत्री भारत भूषण बंसल ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त सभी निजी व सरकारी स्कूल पहली व दूसरी कक्षा के बच्चे को कोई भी होमवर्क नहीं देंगे। पत्र में इसका भी उल्लेख एमएचआरडी ने किया है। पहली से दूसरी तक भाषा, गणित विषय से संबंधित केवल दो ही किताबें अनिवार्य हैं, जबकि तीसरी से पांचवीं तक भाषा, ईवीएस, गणित विषय की केवल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं। छात्र के बस्ते में कोई भी अतिरिक्त किताब या वजन नहीं होना चाहिए।