पहली बार हरियाणा को उम्रदराज और सबसे युवा उप मुख्यमंत्री का नेतृत्व मिला है। सूबे को इन दोनों नेताओं की जुगलबंदी से बहुत उम्मीदें है। प्रदेशवासी भी इस जुगलबंदी से अगले पांच साल में ‘मनोहर’ विकास की आस लगाए बैठे हैं। हरियाणावासी इस बात से उत्साहित है कि अगले पांच सालों में भाजपा-जजपा की ये नई गठबंधन की सरकार अपने-अपने वादों को यदि ईमानदारी से मिलकर धरातल पर उतारती है, तो निसंदेह हरियाणा को विकास की बुलंदियों तक पहुंचने और हरियाणावासियों का जीवन स्तर ऊंचा उठने की संभावनाएं खासी प्रबल रहेंगी।
अब देखना यह है कि भाजपा और जजपा अपने-अपने वादों में तालमेल बिठाकर उसका लाभ कैसे जनता तक पहुंचाते हैं। दरअसल, इस चौदहवें विधानसभा चुनाव में जो जनादेश सामने आया है, उन हालातों में हरियाणा को इस बार फिर एक बार नई गठबंधन की सरकार मिली है। जनादेश के बाद ये सियासी मजबूरियां ही थी, जो चुनाव में धुर-विरोधी रही भाजपा और जजपा को अब एक साथ मिलकर जनता की सेवा करने का मौका मिला है। इतना ही नहीं इनके साथ सात ऐसे निर्दलीय विधायक भी हैं, जिन्हें सरकार का हिस्सा बनकर जनता-जर्नादन की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
हालांकि अभी तक मंत्रीमंडल का गठन होना बाकी है, लेकिन यह तय है कि इस मंत्रीमंडल में भाजपा, जजपा के साथ-साथ निर्दलीयों को भी जगह जरूर मिलेगी। नई विधानसभा के गठन के बाद सीएम मनोहर लाल और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला दोनों ही साथ-साथ सीटों पर विराजमान रहे। तजुर्बेकार मनोहर और ऊर्जावान दुष्यंत नई विधानसभा के पहले दिन फिलहाल अपने-अपने विधायकों के शपथ लेने के दौरान उनका हौसला बढ़ाते हुए दिखाई दिए। इससे पहले सीएम सचिवालय में डिप्टी सीएम दुष्यंत को उनके कार्यालय में उन्हें डिप्टी सीएम की औपचारिक जिम्मेवारी सौंपकर आए थे।
उसके बाद विधानसभा में सीएम और डिप्टी सीएम दोनों की शपथ के साथ ही जनसेवा के लिए दोनों की नई पारी की औपचारिक शुरूआत हो गई।
मनोहर के पास पांच साल का अनुभव
मनोहर लाल की बतौर मुख्यमंत्री यह दूसरी पारी है। वर्ष 2014 से 2019 तक हरियाणा की कमान मनोहर के हाथ थी। अब वर्ष 2019 में भी कमान मनोहर के ही हाथ है, लेकिन इस बार सरकार गठबंधन की है। मनोहर ने अपना पहला कार्याकाल बेदाग रहते हुए पूरा किया। उन्होंने हरियाणा के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए।
कर्मचारियों और किसानों के बड़े आंदोलन भी उनकी सरकार ने झेले, तो वहीं तीन बार हरियाणा में हुई बड़ी आगजनी की घटनाओं को भी अपने विवेक के साथ सीएम ने काबू किया। सरकारी कामों के साथ-साथ सीएम ने भाजपा संगठन की ओर से सौंपी हर जिम्मेवारी को भी बखूबी निभाने का प्रयास किया। इस बार भी चुनाव में भाजपा का चेहरा मनोहर ही थे। कुल मिलाकर सरकार से लेकर संगठन तक मनोहर को अब खासा तुजुर्बा हो चुका है, जिसका लाभ निसंदेह प्रदेश और प्रदेशवासियों को मिलता दिखना चाहिए।
दुष्यंत के पास लोकसभा का भी तजुर्बा
भले ही दुष्यंत को राजनीतिक अनुभव विरासत में मिला है। लेकिन इनेलो से अलग होने के बाद महज 11 महीनों में प्रदेश में एक नई पार्टी जजपा को खड़ा करना और इस विधानसभा चुनाव में पार्टी के 10 विधायक जितवाकर सरकार में बड़ी हिस्सादारी करना एक बड़ी सफलता से कम नहीं है। इनेलो में रहते हुए भी दुष्यंत ने पूरी ऊर्जा के साथ युवा ईकाई की कमान संभालते हुए प्रदेश के बड़े युवा वर्ग को अपने और अपने दल की ओर आकर्षित करने का काम किया। इसके अलावा दुष्यंत को लोकसभा का भी अनुभव है।
वह वर्ष 2014 से लेकर 2019 तक लोकसभा में सबसे कम उम्र के सांसद थे और अब विधानसभा में सबसे कम उम्र के डिप्टी सीएम। हरियाणा और प्रदेशवासियों के लिए कुछ नया और बेहतर करने का जज्बा लेकर विधानसभा पहुंचे दुष्यंत और उनकी टीम के समक्ष कुछ चुनौतियां भी आएंगी। अब देखना यह है कि इन चुनौतियों से पार पाकर वे कैसे जनता की सेवा करते हैं।