2019 के विधानसभा चुनाव में 68.20 फीसदी मतदान हुआ था और 2014 के विधानसभा चुनाव में 76.61 फीसदी मतदान हुआ। कम मतदान से 2019 में भाजपा की सात सीटें कम हो गईं। 2014 में भाजपा ने 47 सीटें जीती थीं, जबकि 2019 में 40 सीटें।
इससे इन्कार नहीं किया जा सकता कि कम मतदान से भाजपा को नुकसान होता है और वोटिंग प्रतिशत बढ़ने से भाजपा का वोट प्रतिशत भी बढ़ता है। केंद्र सरकार की ओर से घोषित नई पेंशन योजना भी इसका एक कारण हो सकता है। कर्मचारी वर्ग भाजपा से नाराज चल रहा है। अब भाजपा इस योजना को जमीन तक ले जाने की पूरी कोशिश करेगी।
इसके लिए भाजपा को थोड़ा समय तो चाहिए होगा। इसलिए मतदान की तारीख बढ़ाने का एक कारण यह भी हो सकता है। भाजपा का पूरा फोकस शहरी मतदाताओं पर है। शहरी लोग छुट्टियां मनाने जाते हैं, इसलिए भी भाजपा ने मतदान की तारीख बढ़ाने की मांग की है।