राज्यपाल के अभिभाषण के साथ बजट सत्र का आगाज
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हरियाणा की खट्टर सरकार के लिए विधानसभा में नजारा इस बार बदला हुआ है। इस बार अपने ही मुश्किल खड़ी कर रहे हैं। विपक्ष से लोहा लेने में सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। यहां तक कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल और मंत्रियों को भाजपा विधायकों का पूर्व की तरह खुला समर्थन सदन में नहीं मिल पा रहा है। इसका उदाहरण जाट आंदोलन के काम रोको प्रस्ताव पर सीएम के जवाब देने के दौरान दिखा।
विपक्ष ने हो-हल्ला कर उन्हें तीन बार बैठने के लिए विवश कर दिया। भाजपा विधायकों के हावभाव भी बदले हुए हैं। जहां वे इनेलो और कांग्रेस के सरकार पर हमलावर होने की स्थिति में पार्टी का बचाव नहीं कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रश्नकाल में तीखे सवाल और अनुपूरक प्रश्न पूछकर भी परेशानी बढ़ाने में लगे हुए हैं। दक्षिणी हरियाणा के विधायक तो सरकारी की नीतियों और काम न होने से खफा थे ही, अब उन्होंने हाईवे बेल्ट के साथ ही अन्य विधायकों को भी अपने साथ मिला लिया है। इससे सरकार सदन में कुछ असहज दिखाई दे रही है।
चूंकि ढाई साल के कार्यकाल में हुए सत्रों के दौरान सरकार की ढाल बनते रहे भाजपा विधायक उमेश अग्रवाल, असीम गोयल, रणधीर कापड़ीवास, पवन सैनी, मूल चंद शर्मा, महिपाल ढांडा, मूल चंद शर्मा, टेक चंद शर्मा इत्यादि इस बार लगभग चुप्पी ही साधे हुए हैं। उनके पुराने तेवर गायब हैं। यही कारण है कि भाजपा सदन में एकजुट नहीं दिख रही है।