हरियाणा कृषि विभाग अब फसलों के उत्पादन और नुकसान के आकलन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद लेगा। अभी राज्य सरकार यह कार्य कर्मचारियों के माध्यम से करवाती है। केंद्र व राज्य सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। इसके लिए एजेंसियों से आवेदन आमंत्रित कर दिए गए हैं। सरकार की योजना है कि आगामी रबी के सीजन में इस तकनीक से काम हो। इस प्रोजेक्ट पर करीब सात करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
ठीक होगा फसल नुकसान का आकलन
नुकसान के आकलन में कई बार किसानों की शिकायतें रहती हैं कि आकलन सही नहीं हुआ। उन्हें पूरा मुआवजा नहीं मिलेगा। एआई की रिपोर्ट से नुकसान का आकलन सही होने पर किसानों की भी इस तरह की शिकायतें नहीं रहेंगी तथा उन्हें नुकसान का पूरा मुआवजा मिल सकेगा।
पहले चरण में करनाल व हिसार जिले का चयन
एआई से जो डाटा एकत्रित होगा, उस डाटा को कर्मचारियों द्वारा एकत्रित किए गए डाटा के साथ मिलान किया जाएगा। यदि दोनों में समानता रहती है या फिर ज्यादा अंतर नहीं रहता है तो विभाग बाद में यह कार्य एआई से ही करवा सकता है। योजना में पहले चरण में धान, गेहूं, सरसों व कपास को शामिल किया जाएगा। योजना में सबसे पहले करनाल व हिसार जिले का चयन किया गया है। दोनों जिलों में करीब सात करोड़ रुपये योजना पर खर्च किए जाएंगे। इसके बाद सात जिलों में, फिर पूरे प्रदेश में योजना को लागू किया जाना प्रस्तावित है। योजना पर केंद्र द्वारा 60 प्रतिशत व प्रदेश सरकार द्वारा 40 प्रतिशत खर्च वहन किया जाएगा।
एआई मॉडल के लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए गए हैं। एआई से खेतीबाड़ी में क्रांति आएगी, जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी। -नरहरि सिंह बांगड़, निदेशक, कृषि विभाग, हरियाणा।