गुरदासपुर उपचुनाव मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए एक तीर से दो निशाने के समान है। उपचुनाव में जीत से कैप्टन अमरिंदर सिंह को दोहरा फायदा मिलेगा। इनमें सबसे बड़ा फायदा माझा जोन में कैप्टन की राजनीतिक पैठ बढ़ने से मिलेगा। इसके अलावा छह महीने पुरानी कांग्रेस सरकार की अब तक की कारगुजारी का रिपोर्ट कार्ड भी मिल जाएगा। माझा में कई कांग्रेसी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के अंदरखाने विरोधी रहे हैं।
कैप्टन के राजनीतिक सफर में आड़े आने वाले कांग्रेसियों में अधिकतर माझा जोन के हैं। हालांकि माझा के अधीन आती अमृतसर लोकसभा सीट से कैप्टन सांसद रह चुके हैं। फिर भी माझा में जमीनी स्तर पर कैप्टन की पैठ कम है। कैप्टन के करीबी सुनील जाखड़ को गुरदासपुर उपचुनाव में टिकट मिलना, इसका सबसे बड़ा उदाहरण कि सीएम यहां पैठ बढ़ाना चाहते हैं। उपचुनाव के नतीजे से यह साफ हो जाएगा कि जनता कैप्टन सरकार के कार्यों से खुश है या नहीं। भाजपा व आम आदमी पार्टी ने कैप्टन सरकार के छह महीने के कार्यकाल पर वादाखिलाफी का आरोप लगाकर उन्हें सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सत्ता में आते ही बदले अमरिंदर के तेवर
कैप्टन अमरिंदर सिंह का माझा की तरफ रूझान सत्ता में आने के बाद से ही बढ़ गया है। बतौर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने स्वतंत्रता दिवस पर माझा में आकर ही झंडा फहराने की रस्म अदा की। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। अब कैप्टन अमरिंदर सिंह दशहरा भी माझा में ही मनाने जा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि कैप्टन माझा जोन में अपने विरोधियों को परास्त करना चाहते हैं।