चंडीगढ़ में भू-जल के लगातार बढ़ रहे दोहन से जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। वहीं, बारिश व अन्य विधियों से भू-जल के रिचार्ज न होने से स्थिति गंभीर होती जा रही है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के हाल में किए गए सर्वे के आंकड़े चिंताजनक हैं। ऐसी स्थिति तब है, जब शहर में सातों दिन 24 घंटे पानी की आपूर्ति की तैयारी चल रही है। केंद्रीय जलसंसाधन मंत्रालय की ओर से जारी डायनामिक वाटर रिसोर्स-2020 के सर्वे में साल 2017 की तुलना में चंडीगढ़ में 2020 में स्थिति और खराब हो गई है। चंडीगढ़ को भूजल स्तर को लेकर वर्तमान में अर्द्ध गंभीर (सेमी क्रिटिकल) श्रेणी में रखा गया है। बता दें कि चंडीगढ़ 100 प्रतिशत भूजल में से 57.38 प्रतिशत का दोहन कर लेता है।
शहर के अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें तो मनीमाजरा में 100 प्रतिशत भूजल में से 80 प्रतिशत का दोहन होता है, जबकि पांच साल पहले यह आंकड़ा 65 प्रतिशत तक था। इस क्षेत्र को केंद्र ने चिंताजनक स्थिति में रखा है। हालांकि, यहां काफी पथरीला क्षेत्र है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, हालात नहीं सुधरे तो आगामी वर्षों में शहर के अन्य क्षेत्र भी चिंताजनक श्रेणी में पहुंच जाएंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ में सभी स्रोतों से 114 स्क्वॉयर मीटर क्षेत्र में भूमिगत जल रिचार्ज होता है। मानसून में बारिश से एक करोड़ क्यूबिक मीटर (सीबीएम) और अन्य स्रोतों से 0.02 सीबीएम पानी भूमि में जाता है। वहीं, अन्य दिनों में बारिश से 50 लाख क्यूबिक मीटर (सीबीएम) और अन्य स्रोतों से तीन करोड़ क्यूबिक मीटर पानी भूमि में जाता है। हर साल सिंचाई में एक करोड़ क्यूबिक मीटर, इंडस्ट्री में 20 लाख क्यूबिक मीटर, घरेलू कार्यों में तीन करोड़ क्यूबिक मीटर पानी का दोहन कर लेते हैं, इसलिए रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 से 2020 तक चंडीगढ़ ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए और भूमिगत जलस्तर नीचे गया। इस कारण मात्र एक नंबर दिया गया है।
भूजल बढ़ाने के लिए अधिकारी महज कागजों में ही काम करते हैं। एनजीटी की फटकार के बाद निगम ने कैंबवाला, सारंगपुर और खुड्डा अलीशेर और प्रशासन मलोया, धनास गांव और कैंबवाला के दूसरे तालाब गोद लेने का फैसला किया है। वर्ष 2019 में जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देश के 254 जिलों की सूची जारी कर बताया था कि इन शहरों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। सूची में चंडीगढ़ का भी नाम शामिल था। उसके बाद निगम ने खुड्डाअलीशेर का पक्का तालाब और प्रशासन ने सेक्टर-43 की झील को गोद लिया था, जो महज खानापूर्ति ही रही।
पंजाब विश्वविद्यालय के भूजल विशेषज्ञ विनोद के चौधरी ने बताया कि अधिकारियों के पास भूमिगत जल को बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। दूसरी ओर, शहर के एक सेक्टर में हुई बारिश को बचा लिया जाए तो पूरे साल शहर को पानी दिया जा सकता है, लेकिन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम खानापूर्ति के लिए लगे हैं। देखरेख के अभाव में उनमें पानी तक नहीं जाता है। गिरते भूजल से पानी में रसायन की मात्रा बढ़ रही है, जिससे बीमारियां बढ़ रही हैं।
नगर निगम जल ही जीवन मिशन योजना के तहत पूरे शहर में टर्शरी वाटर की पाइप लाइन डलवा रहा है। लगभग 60 करोड़ की लागत से पाइप लाइन डलने के बाद 20 लाख मिलियन गैलन (एमजी) पीने का पानी और 15 लाख मिलियन गैलन भूमिगत जल की बचत होगी। इस योजना के तहत शहर के सभी स्कूलों के पार्कों, सरकारी व निजी पार्कों, कॉलेज व पीयू के पार्कों, ग्रीन एरिया को कवर किया गया है।
शहर में कई जगह कैनाल वाटर लाइन नहीं है, इसलिए वहां ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति की जा रही है। शहर में अभी भी 160 टयूबवेल हैं, जो जमीन से पानी खींच रहे हैं। अतिरिक्त पानी आने के बावजूद निगम इन्हें बंद नहीं करा सका है।
गांव में बने तालाबों की दुर्गति हो गई है। दड़वा में तालाब पर पार्क बना दिया गया है, वहीं डड्डूमाजरा में तालाब सूखा पड़ा है। धनास का तालाब बदहाल है, तो कैंबवाला और खुड्डाजस्सू में अभी तालाबों को सहेज कर रखा गया है। सांसद आदर्श गांव सारंगपुर, खुड्डाअलीशेर और बहलाना के तालाब पर कब्जा हो चुका है, वहीं गंदगी का भी
भूमिगत जलस्तर को देखते हुए मनीमाजरा में सातों दिन 24 घंटे पानी की आपूर्ति योजना का शिलान्यास रखा गया है। सबसे पहले वहां जल संरक्षण का काम शुरू करेंगे। 24 घंटे पानी की आपूर्ति योजना शहर में लागू होते ही ट्यूबवेल पूरी तरह से खत्म कर दिए जाएंगे। इससे भी भूमिगत जल बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। -आनिंदिता मित्रा, आयुक्त नगर निगम