चंडीगढ़। नगर निगम की ओर से अतिक्रमण और अवैध वेंडिंग के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियानों के बीच जब्त किए गए करोड़ों रुपये के सामान की नीलामी अधर में लटकी हुई है। निगम के स्टोर में लंबे समय से पड़ा यह सामान अब न सिर्फ जगह की कमी बल्कि आर्थिक नुकसान का कारण भी बनता जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि समय रहते नीलामी नहीं हुई तो बड़ी मात्रा में सामान खराब हो सकता है।
नगर निगम की कार्रवाई के चलते स्टोर लगातार भरता जा रहा है। इसी महीने अब तक करीब 3000 चालान किए जा चुके हैं जिनमें से लगभग 30 प्रतिशत वेंडरों ने अपना सामान अभी तक नहीं छुड़ाया है। इसके अलावा 700 से ज्यादा अवैध वेंडरों का सामान जब्त किया गया है जिसे किसी भी सूरत में वापस नहीं किया जाएगा।
पिछली नीलामी में आधा ही बिक पाया सामान
नगर निगम ने कुछ महीने पहले जब्त सामान की नीलामी की कोशिश की थी। उस समय करीब 25 लाख रुपये की बोली सामने आई थी लेकिन वास्तव में सिर्फ 12 लाख 50 हजार रुपये का ही सामान नीलाम हो सका। इसके बाद से दोबारा नीलामी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। निगम अधिकारियों के अनुसार अब सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल के माध्यम से नीलामी कराने की तैयारी की जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा सामान का निपटान हो सके।
रेट तय करने के लिए बनी है विशेष कमेटी
नगर निगम में जब्त सामान की नीलामी से पहले उसके मूल्यांकन के लिए एक विशेष कमेटी गठित की जाती है। इसमें विभिन्न विभागों और सेक्टरों से जुड़े अधिकारी शामिल होते हैं। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर ही नीलामी दर तय होती है और प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।
28 दिन में सामान न छुड़ाया तो नीलामी
नियमों के अनुसार अतिक्रमण के दौरान जब्त सामान को छुड़ाने के लिए वेंडर को 2000 रुपये जुर्माना देना होता है। यदि 28 दिन के भीतर सामान नहीं छुड़ाया गया, तो नगर निगम को नीलामी का अधिकार होता है। अवैध वेंडरों से जब्त सामान की सीधे नीलामी की जाती है। फिलहाल निगम स्टोर में गैस सिलिंडर, बर्तन, कपड़े, सोफा, लकड़ी की अलमारियां और विभिन्न स्टैंड रखे हैं। अनुमान है कि इनकी कुल कीमत 50 लाख रुपये से अधिक हो सकती है।
कोट
जब्त सामान की नीलामी के लिए बनी कमेटी से जल्द बात कर रेट तय करवाए जाएंगे और जेम पोर्टल के जरिए निलामी का आदेश दिया जाएगा। -हरप्रीत कौर बबला, मेयर