चार चरणों में होती है काउंसलिंग
पहले चरण में 150 सीटों के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाती है। अगर कोई स्टूडेंट कॉलेज छोड़ देता है तो उसकी सीट पर दाखिले के लिए दूसरे चरण की काउंसलिंग की जाती है। पिछली बार ऑल इंडिया कोटा के फर्स्ट काउंसिलिंग में प्रवेश लेने वाले एक भी स्टूडेंट ने कॉलेज नहीं छोड़ा था। इसके कारण दूसरी काउंसलिंग की नौबत ही नहीं आई थी।
सामान्य तौर पर दूसरी काउंसलिंग के बाद भी अगर कोई सीट खाली रह जाए तो मॉलअप राउंड में वेबसाइट पर सूचना देकर छात्रों को प्रवेश का मौका दिया जाता है। इस चरण में मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाता है।
अंतिम चरण सेव वेकेंसी राउंड होता है। इसमें अंत में बचे हुए इक्का-दुक्का सीटों पर प्रवेश दिया जाता है लेकिन यहां तक आने की नौबत ही नहीं बचती, क्योंकि सभी सीटें तीसरे चरण तक हर हाल में भर जाती हैं।
ये है स्टेट कोटे का मानक
150 में से 15 प्रतिशत पर ऑल इंडिया कोटे से दाखिले के बाद केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) कोटे की बारी आती है। इसमें चंडीगढ़ के छात्र और पांच साल तक निवास करने वालों को प्रवेश का मौका दिया जाता है।
जीएमसीएच-32 में एमबीबीएस की यूटी पूल में 115 सीटें शामिल हैं। इसके तहत एससी कोटे में 17, दिव्यांग कोटे में छह और सामान्य कोटे में 92 सीटें हैं। एमबीबीएस में ऑल इंडिया कोटे में 22 सीटें, सेंट्रल पूल में तीन और एनआरआई कोटे में नौ सीटें शामिल हैं।
यूटी कोटे से एमबीबीएस में दाखिले के मानक
- अभ्यर्थी ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूल से 10वीं, 10+1 और 10+2 की पढ़ाई नियमित छात्र के रूप में की हो।
- अभ्यर्थी के माता-पिता पिछले पांच वर्षों से चंडीगढ़ के निवासी हों।
- अभ्यर्थी के माता-पिता केंद्र सरकार/राज्य सरकार के कर्मचारी या तीन वर्षों से चंडीगढ़ प्रशासन के सरकारी कर्मचारियों/स्वायत्त निकायों/कंपनियों में काम करने वाले हों।
नोट- हालांकि उपरोक्त सभी चार श्रेणियों के उम्मीदवारों को एक अंडरटेकिंग/हलफनामा प्रस्तुत करना होगा कि उम्मीदवार ने नीट परिणाम की घोषणा के बाद चंडीगढ़ के अलावा किसी अन्य राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में निवास का विकल्प नहीं चुना है और दावा नहीं किया है।