रोज फेस्टिवल में स्टाल के आवंटन में हुई धांधली की शिकायत प्रशासक के सलाहकार से करने की सजा सिटको के निलंबित जीएम (टूरिज्म) एके मल्होत्रा को मिली।
यूटी प्रशासन ने मंगलवार को जिस अफरा-तफरी में मल्होत्रा को निलंबित किया उस पर अब सवालिया निशान लगने लगे हैं।
सिटको बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर्स की मंगलवार शाम को आपातकालीन बैठक बुलाकर रात आठ बजे मल्होत्रा के निवास स्थान पर उन्हें निलंबित करने के आदेश भेजे गए।
इसमें निलंबन के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया। यही नहीं निलंबित की पूरी प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई।
सूत्रों के अनुसार, उन्हें सिर्फ इसलिए निलंबित कर दिया, क्योंकि उन्होंने रोज फेस्टिवल के दौरान स्टाल आवंटन में हुई धांधली की विजिलेंस जांच कराने संबंधी पत्र प्रशासक के सलाहकार और गृह सचिव को भेज दिया था।
इससे पहले भी मल्होत्रा ने सिटको में बढ़ रही अनुशासनहीनता और अन्य गड़बड़ियों की शिकायत प्रशासन के उच्च अधिकारियों से कर चुके हैं।
सिस्टम फॉलो नहीं करने का लगा आरोप
चंडीगढ़ प्रशासन के गृह सचिव और सिटको बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर्स के चेयरमैन अनिल कुमार ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि मल्होत्रा अपने पद की गरिमा का उल्लंघन करते हुए सीधे उच्चाधिकारियों से संवाद दिया।
उन्होंने सिस्टम को फॉलो नहीं किया और अनुशासन का पालन नहीं किया। मल्होत्रा के खिलाफ डबल डेकर बस के ठेके में गोलमाल करने के मामले की विजिलेंस जांच भी चल रही है।
मल्होत्रा ने कहा था बिजिलेंस से कराई जाए जांच
ध्यान रहे कि मल्होत्रा ने हाल ही में प्रशासक के सलाहकार को शिकायत दी थी कि रोज फेस्टिवल के दौरान स्टाल के आवंटन में धांधली हुई।
उन्होंने इसकी विजिलेंस जांच कराने को कहा था। लेकिन, प्रशासन ने विजिलेंस जांच कराने से पहले ही मल्होत्रा को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।
सूत्रों का कहना है कि मल्होत्रा की ओर से जिस तरह से सीधा उच्च अधिकारियों सो पत्र भेजे जा रहे थे, उससे सिटको की एमडी तन्वी गर्ग नाराज हो गई थीं। इस साल मल्होत्रा को स्टाल आवंटन की प्रक्रिया से दूर रखा गया।