-शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक ने सौंपा था 197 पन्नों का हलफनामा
-कोर्ट में मौजूद अधिकारी पूछे सवालों का नहीं दे सके जवाब, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। विभिन्न निकाय क्षेत्रों में अतिक्रमण को लेकर अधूरी जानकारी देने पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय विभाग पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। 197 पन्नों के सहायक दस्तावेजों के साथ हलफनामा होने के बावजूद स्पष्ट जानकारी न होने और कोर्ट में मौजूद अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब न मिलने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए यह आदेश जारी किया है। पिछली तारीख पर हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक ने जवाब दिया था कि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटान के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया था कि अतिक्रमण से संबंधित मामलों पर स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाएगी और अतिक्रमण से मुक्त कराई गई जमीन का जनहित के लिए इस्तेमाल होगा। लेकिन जब यह मामला सुनवाई के लिए आया, तो विभाग उचित विवरण प्रस्तुत करने में विफल रहा। मामला सुनवाई के लिए पहुंचा तो शहरी स्थानीय निकाय निदेशक यशपाल का हलफनामा पेश किया गया जिसे हाईकोर्ट ने अधूरा और अपर्याप्त बताया। विभाग के उपस्थित अधिकारी कब्जों को लेकर हाईकोर्ट के सवालों का जवाब नहीं दे सके। कितने मामलों में अतिक्रमण को लेकर अदालतों में मामले लंबित हैं यह जानकारी भी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि 197 पृष्ठों के सहायक दस्तावेजों के साथ दाखिल किया गया हलफनामा विभाग के अधिकारियों ने पढ़ना तक जरूरी नहीं समझा। हाईकोर्ट ने सरकार को बेहतर जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय देते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। हालांकि इस रवैए पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने विभाग पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। हालांकि दोषी अधिकारी से इसकी वसूली करने की विभाग को छूट दी है।
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इससे पहले हाईकोर्ट को बताया गया था कि राज्य में नगरपालिका क्षेत्रों में कुल लगभग 4360 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण है। गुरुग्राम के सोहना क्षेत्र में 1896.55 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण है। पंचकूला के कालका में 486 एकड़ क्षेत्र, झज्जर के बेरी में 145.75 एकड़, पिहोवा में 243.48 एकड़ भूमि, शाहाबाद में 622.5 एकड़ भूमि और थानेसर जिला कुरुक्षेत्र में 149.9 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण है। भिवानी के बवानी खेड़ा में करीब 230 एकड़ जमीन पर कब्जा है और उसे हटाने के मामले कथित तौर पर 2016 से लंबित हैं। अंबाला शहर में 24.62 एकड़ और अंबाला सदर में 90.6 एकड़ जमीन पर कब्जा है। इस प्रकार अंबाला में 115 एकड़ से अधिक भूमि अतिक्रमण के अधीन है और अभी तक मुद्दों को देखने वाले अधिकारी को पिछले कुछ वर्षों से तैनात नहीं किया गया है।