रूस और यूक्रेन में छिड़ी जंग ने जहां पूरे विश्व की चिंता बढ़ा दी है, वहीं यूक्रेन में पढ़ाई करने वाले भारतीय विद्यार्थियों के परिजन परेशानी के आलम में है। कुछ विद्यार्थियों ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन्हें वापस लाने का इंतजाम करने की मांग की है। शुक्रवार को मानसा के पांच परिवारों ने अपने बच्चों की सलामती व घर वापसी को लेकर प्रधानमंत्री के नाम डिप्टी कमिश्नर मानसा को मांग पत्र सौंपा है।
इस दौरान निर्मल सिंह, गुरतेज सिंह व बलविंद्र शर्मा ने बताया कि उनकी बेटियां मनजिंद्र कौर मानसा, अनामिका शर्मा भीखी, जशनप्रीत कौर खड़क सिंह वाला, सुखप्रीत कौर रल्ला और मनु कौर रल्ला मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गई थीं जो वहां तीन साल पढ़ाई कर रही हैं लेकिन वहां की सरकार ने उन्हें जंग होने की कोई जानकारी नहीं दी। यही कारण है कि उन्होंने अपनी कोई टिकट बुक नहीं करवाई और देश में एकदम जंग छिड़ने के कारण वह फंस चुके हैं।
वह बंकरों में रहकर समय बिता रहीं हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्होंने भारत सरकार के नाम डिप्टी कमिश्नर को पत्र सौंपा है। सरदूलगढ़ के गांव झंडा कलां के गुरमीत सिंह की पुत्री अमनदीप कौर जो 12 दिसंबर 2022 को एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गई थी, वहां फंस गई हैं। छात्रा अमनदीप कौर ने अपने परिजनों से व्हाट्सएप पर बातचीत की और बताया कि यूक्रेन सरकार द्वारा अलर्ट करने के बाद उन्हें एक मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में रखा गया है।
यहां 800 विद्यार्थी मौजूद हैं। उनके पास खाने-पीने की चीजें सीमित रह गई हैं। उन्होंने भारत सरकार से मांग की है कि उन्हें जल्द यहां से निकाला जाए। अमनदीप कौर के पिता गुरमीत सिंह का कहना है कि उन्होंने मुश्किल से पैसे एकत्र कर अपनी बेटी को पढ़ाई करने यूक्रेन भेजा था लेकिन वहां की टिकट महंगी होने के कारण वह बेबस है।
शिरोमणि अकाली दल मानसा की महिला विंग की अध्यक्ष सिमरजीत कौर सिम्मी ने बताया कि पीड़ित परिवारों की सांसद हरसिमरत कौर बादल से बातचीत करवाई गई है और उन्होंने विदेश मंत्रालय से बच्चों को वापस लाने की बात की है।