प्रदेश सरकार ने ओवरटाइम खत्म कर तय किया है कि रोडवेज ड्राइवर-कंडक्टर सप्ताह में सिर्फ आठ घंटे काम करेंगे। लंबी दूरी की बसों के ड्राइवर-कंडक्टरों को 48 घंटे की ड्यूटी के बाद अवकाश पर भेजने की व्यवस्था की गई है। वहीं लोकल रूट पर नियमित रूप से आठ घंटे की ड्यूटी करवाई जाएगी। इस हिसाब से प्रदेशभर में ड्राइवरों-कंडक्टरों की संख्या बसों के रोटेशन के हिसाब से कम हो गई है। नई व्यवस्था के कारण अकेले रोहतक जिले में रविवार तक 15 गांवों में रोडवेज ने बसों का रात्रि ठहराव बंद कर दिया है। 25 और गांवों में रात्रि ठहराव बंद करने की तैयारी है।
रेवाड़ी-नारनौल समेत सभी जिलों के गांवों से आकर शहर में पढ़ने वाले विद्यार्थी और कर्मचारी बसें न मिलने से सही समय पर संस्थान तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। नारनौल के मोखुता, कोरियावास, हसनपुर, मारौली, धानोता और दनचोली आदि गांवों से राजकीय कॉलेज पहुंचने वाली छात्राओं ने कहा कि उनका बस पास बना हुआ है।
रात्रि ठहराव बंद होने से कारण बस ही नहीं मिल रही हैं और उनका यह पास किसी काम का नहीं रह गया है। कॉलेज छात्राओं ने रोडवेज जीएम के नाम सोमवार को ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की गुहार लगाई। उधर, रेवाड़ी में समय पर बसें न मिलने से परेशान गांव खंडोड़ा के विद्यार्थियों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
सरकार ने यह किया था दावा
ग्रामीण अंचल की 60 फीसदी मासिक हाजिरी वाली सभी छात्राएं, जिनके गांव के तीन किमी के दायरे में आठवीं से आगे का स्कूल नहीं हैं छात्रा परिवहन सुरक्षा योजना के तहत पात्र होंगी। बस सुविधा न होने की स्थिति में स्कूल प्रबंधन समिति, अभिभावकों और अध्यापकों को मिलकर छात्राओं को बस, मिनी बस, कार, कैब, मैक्स, जीप या ऑटो के माध्यम से सुरक्षित स्कूल पहुंचाने-वापस घर ले जाने की व्यवस्था करेंगे। निशुल्क साइकिल योजना वाली छात्राएं फिलहाल इसके लिए पात्र नहीं हैं।