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चंडीगढ़वासी ध्यान दें, अब शहर में बनेंगे तीन कचरा कलेक्शन सेंटर, न दुर्गंध होगी और न ही कचरा

Thu, 01 Aug 2019 12:25 PM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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डोर-टु-डोर कचरा कलेक्शन करने वाले वाहनों को पूरे शहर का चक्कर लगाकर जेपी प्लांट तक न जाना पड़े, इसके लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में तीन जगहों पर स्मार्ट सिटी ट्रांसफर स्टेशन एंड मैटेरियल रिकवरी सेंटर (कचरा कलेक्शन सेंटर) बनाए जाएंगे। शहर भर से गाड़ियां कचरा लेकर इन सेंटरों पर आएंगी, जहां कचरे को सेग्रीगेट कर एक टैंकरनुमा कैप्सूल में रख जाएगा। इसके बाद टैंकरनुमा कैप्सूल को बड़ी गाड़ियों के माध्यम से जेपी प्लांट तक ले जाया जाएगा। इस तरह कचरा कलेक्ट करने वाली गाड़ियों को पूरे शहर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
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वहीं, कचरे के कैप्सूल में बंद होने के कारण न तो दुर्गंध फैलेगी और न ही कचरा सड़कों पर गिरेगा। साथ ही जेपी प्लांट से लगातार मिल रही शिकायत भी दूर हो जाएगी। 32 करोड़ की लागत से तैयार इस प्रोजेक्ट के लिए इसी सप्ताह टेंडर जारी किया जाएगा। प्रोजेक्ट टेक्निकल कमेटी से पहले ही पास हो चुका है। योजना के तहत इंडस्ट्रियल एरिया फेस-1, 3 बीआरडी के पास सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में और डड्डूमाजरा में ट्रांसफर स्टेशन एंड मैटेरियल रिकवरी सेंटर बनाया जाएगा।

उपयोग होने वाले सामान को कचरे से किया जाएगा अलग
वैसे तो कचरा कलेक्ट करने वाली गाड़ियों में ही गीला और सूखा कचरा सेग्रीगेट करके लाने की व्यवस्था है, लेकिन इन सेंटरों पर भी कचरे को सेग्रीगेट करने की व्यवस्था रहेगी। इसके तहत गीला कचरा वैसे के वैसा ही एक पट्टे के जरिए कैप्सूल में चला जाएगा, लेकिन सूखा कचरा पहले पीछे की ओर जाएगा। वहां उपयोग होने वाले अथवा कबाड़ को अलग कर लिया जाएगा। जो बाद में बेचा जा सकेगा। यह कचरा सेग्रीगेट होकर ही कैप्सूल में जाएगा। यहां मशीन से दबाव डालकर गीले कचरे को पूरी तरह सुखा दिया जाएगा। 
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शहर के 39 सफाई केंद्र हो जाएंगे खाली

इस प्रोजेक्ट के तैयार होने के बाद शहर के 39 सहज सफाई केंद्र पूरी तरह खाली हो जाएंगे। निगम के पास लगभग 400 गज जगह शहर के बीचोबीच उपलब्ध होगी। इन केंद्रों पर निगम सेक्टर के पार्कों का कचरा, पेड़ों के पत्ते और घरों से निकलने वाला हार्टिकल्चर वेस्ट इकट्ठा कर कंपोस्ट खाद बनाने की योजना है।  

नॉन मोटराइज्ड ट्रांसपोटेशन के लिए स्टैंड बनाने की योजना
वर्तमान में बने सहज सफाई केंद्र में सभी व्यवस्थाएं हैं। बिजली, पानी और टॉॅयलेट सहित चारों ओर से दीवार भी बनी हुई है। स्मार्ट सिटी की योजना है कि नॉन मोटराइज्ड ट्रांसपोटेशन के लिए स्टैंड व चार्जिंग स्टेशन के लिए इन केंद्रों का उपयोग किया जा सकता है। यह केंद्र सेक्टर के बीचों बीच है तो लोगों की पहुंच भी आसानी होगी। ऐसे में जो लोग निजी वाहनों को प्राथमिकता देते हैं उन्हें आसानी से पब्लिक शेयर वाहन मिल सकेंगे।

टेंडर लेने वाली कंपनी के लिए भी बेहतर विकल्प
यदि सहज सफाई केंद्र में नॉन मोटराइज्ड ट्रांसपोटेशन के लिए स्टैंड व चार्जिंग स्टेशन बनाया जाता है तो टेंडर लेने वाली कंपनी की रुचि भी बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा कंपनियां इस टेंडर को लेने का प्रयास करेंगी क्योंकि यह केंद्र लोगों की पहुंच तक हैं और कंपनी को ओला की तरह ही अधिक लोगों का रिस्पांस मिलने की उम्मीद रहेगी। वहीं यदि कंपनी को दीवारों पर विज्ञापन की अनुमति दी जाती है तो रेवेन्यू के भी बेहतर अवसर होंगे। साथ ही सिटी को मोटरव्हीकल से फ्री सिटी बनाने में एक बड़ा कदम होगा।
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