चंडीगढ़। गैंगस्टर संपत नेहरा के करीबी गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने सेक्टर-32 के ट्रांसपोर्टर अंग्रेज सिंह विर्क से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। बाद में 25 लाख में बात बन गई। इसके बाद विर्क ने संपत के गुर्गे को सात लाख रुपये दे दिए लेकिन उन्हें फोन आते रहे। परेशान होकर वह पुलिस के पास पहुंच गए। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस ने गुर्गे को दबोच लिया। आरोपी की पहचान किशनगढ़ निवासी मंजीत सिंह उर्फ सोनू (27) के रूप में हुई है। आरोपी से पुलिस ने तीन लाख रुपये, एक पिस्टल, चार कारतूस, 11 सिम और दो मोबाइल बरामद किए हैं।
आरोपी को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस रिमांड के दौरान बाकी के चार लाख रुपये बरामद करेगी। पुलिस ने बताया कि मंजीत आढ़तियों, ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों के नंबर संपत नेहरा को देता था। संपत इन नंबरों को गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को देकर रंगदारी मंगवाता था। ऑपरेशन सेल के प्रभारी अमनजोत सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने मंजीत को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। आरोपी मंजीत सिंह गैंगस्टर संपत नेहरा के साथ दौड़ का अभ्यास करता था और दोनों ने एक साथ चंडीगढ़ पुलिस की भर्ती भी दी थी।
सेक्टर-32 निवासी अंग्रेज सिंह विर्क ने बताया कि पंचकूला सेक्टर-20 में उनका ट्रांसपोर्ट का कारोबार है। उन्हें 22 जनवरी की शाम को इंटरनेशनल नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने कहा कि वह गैंगस्टर गोल्डी बराड़ बोल रहा है, उसे एक करोड़ रुपये की रंगदारी चाहिए। दो तीन दिन तक विर्क ने खुद के व्यस्त होने की बात कहकर मामला टाल दिया। बाद में एक अन्य इंटरनेशनल नंबर से कॉल कर आरोपी ने कहा कि रुपये दे रहा है या नहीं, या लड़के भेजकर गोली मरवा दूं। इस पर विर्क ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं। इस पर कॉल करने वाले ने बताया कि उसे सब पता है। तेरा मोहाली में घर और मर्सिडीज गाड़ी है। तेरे बच्चे कहां खेलते हैं, यह भी पता है। बच्चे उठवा लिए तो तू एक करोड़ क्या डेढ़ करोड़ भी देगा। बाद में विर्क पांच लाख रुपये देने को तैयार हो गए। इस पर कॉल करने वाले ने कहा कि मैं आखिरी बार बोल रहा हूं 25 लाख दे दे। 10 अभी और 15 लाख के लिए हफ्ते बाद कॉल करूंगा।
सात लाख देने के बाद फिर मांगने लगे रुपये, तब की शिकायत
मंजीत ने 28 जनवरी शाम छह बजे अंग्रेज सिंह विर्क को फोन कर कहा कि उसे गोल्डी बराड़ के फोन कॉल के बारे में पता है। इसके बाद मंजीत और विर्क की मुलाकात उनके एक दोस्त ऑफिस मेें मंजीत से हुई। मंजीत ने कहा कि उसे 18 जनवरी को ही पता था कि उनके पास फोन आने वाला है। कहा कि उसे संपत नेहरा फोन आया था। संपत ने ही उसे उनसे बात करने को कहा है। मंजीत बोला तुमने उन्हें 25 लाख के लिए हां कर दी है तो रुपये तो देने पड़ेंगे। हालांकि वह संपत से बात करेगा और अब उनके पास फोन न आए। इसके बाद एक फरवरी को मंजीत ने विर्क को फोन कर सेक्टर-20 में बुलाया और संपत से वीडियो कॉल पर बात की। मंजीत ने संपत से कहा विर्क के पास 15 लाख रुपये नहीं हैं, 10 लाख रुपये ले लो। इसके बाद विर्क ने तीन लाख रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए और चार लाख रुपये नकद दे दिए। इसके बाद चार फरवरी को मंजीत ने विर्क के सामने गोल्डी बराड़ को वीडियो कॉल की। गोल्डी ने कहा 7 लाख रुपये आ गए हैं, बाकी पैसों का जुगाड़ कर। इसके बाद विर्क के पास गोल्डी की फिर से कॉल आई, तो उन्होंने काट दी। इसके बाद उसने धमकी भरे वॉयस मैसेज भेजे। परेशान होकर विर्क पुलिस के पास पहुंचे और शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने मंजीत को दबोच लिया।
संपत के कहने पर मंजीत ने तीन लाख रुपये पुलिसकर्मी के बेटे को दे दिए
चंडीगढ़ पुलिस के एक कर्मचारी का बेटा गैंगस्टर संपत नेहरा का दोस्त है। तिहाड़ जेल में बंद संपत ने फोन कर उससे कहा कि मंजीत उसे तीन लाख रुपये देगा, संभालकर रख लेना। इसके बाद मंजीत से रुपये लेकर उसने रख लिए। बाद में पुलिसकर्मी के बेटे ने तीन लाख रुपये थाने आकर पुलिस को सौंप दिए। पुलिस ने इस मामले में उसे गवाह बना लिया है। मंजीत ने चार लाख रुपये एक अन्य युवक को दिए हैं, जिसके बारे में पुलिस पूछताछ कर रह रही है।