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Chandigarh News: 504 करोड़ के बैंक घोटाले की रकम सोने में भी निवेश, दो प्रतिष्ठानों से 5.59 किलो जब्त

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सीबीआई की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में खुलासा : ज्वेलर्स से नकदी लेकर कारोबारी विक्रम वाधवा के घर और होटल तक पहुंचाई गई
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14 जनवरी को 50-50 लाख की दो डिलीवरी, 17 जनवरी को एक करोड़ रुपये पहुंचाने का जिक्र
वाधवा से जुड़े 37.82 करोड़ के लेनदेन की जांच, पांच संपत्तियों में 55 करोड़ के निवेश का दावा
सीबीआई खंगाल रही रकम के कथित गबन से लेकर सोने की खरीद और प्रॉपर्टी में निवेश तक की कड़ियां
खास खबर
परीक्षित सिंह
चंडीगढ़। 504 करोड़ रुपये के आईडीएफसी बैंक घोटाले में सरकारी खजाने से निकली रकम कहां खपाई गई, इसकी चौंकाने वाली कड़ियां सीबीआई की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में सामने आई हैं। जांच में चंडीगढ़ के सेक्टर-23सी के दो प्रतिष्ठानों से 5.59 किलो सोना और आभूषण जब्त किए जाने का खुलासा हुआ है। जांच के मुताबिक इनकी शुद्ध सोने की मात्रा 4.366 किलो है। चार्जशीट में सोने की खरीद से लेकर नकदी की डिलीवरी और प्रॉपर्टी में निवेश तक के लेनदेन का उल्लेख किया गया है। चार्जशीट में मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के कर्मचारियों मनीष और राहुल के बयान भी दर्ज हैं। इनके मुताबिक ज्वेलर्स से नकदी लेकर रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा के घर और होटल लैंडमार्क तक पहुंचाई जाती थी। रिकॉर्ड में 14 जनवरी 2026 को 50-50 लाख रुपये की दो डिलीवरी और 17 जनवरी को एक करोड़ रुपये पहुंचाने का उल्लेख है। सीबीआई अब इन लेनदेन के जरिये नकदी के स्रोत और कथित फर्जी डेबिट से उसके संबंध की जांच कर रही है। वहीं, सप्लीमेंट्री चार्जशीट में वाधवा से जुड़े 37.82 करोड़ रुपये के लेनदेन और पांच संपत्तियों में करीब 55 करोड़ रुपये के निवेश का भी जिक्र किया गया है। यानी जांच का फोकस अब सिर्फ रकम के गबन पर नहीं बल्कि उसे सोने और संपत्तियों में खपाने के कथित नेटवर्क पर भी है।
दो दुकानों पर छापे में मिला 5.59 किलो सोनासीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक 29 मई 2026 को सेक्टर-23सी स्थित एम/एस श्री कम्प्यूटरीकृत गोल्ड टेस्टिंग से 2,321.630 ग्राम सोना जब्त किया गया। जांच में इसकी शुद्ध मात्रा 2,186.840 ग्राम आंकी गई। यहां से सीपी प्लस कंपनी का फुल एचडी नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर (एनवीआर) भी मिला। इसी दिन एम/एस श्री ज्वेल्स से 3,268.780 ग्राम सोने के आभूषण जब्त किए गए, जिनमें शुद्ध सोने की मात्रा 2,179.500 ग्राम आंकी गई। दोनों जगहों से जब्त सोना नई दिल्ली स्थित ईओ-III के मालखाने में जमा कराया गया।
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पांच संपत्तियों में रकम लगाने की बात
चार्जशीट के मुताबिक विक्रम वाधवा ने बताया कि रिभव ऋषि से मिली रकम में से करीब 55 करोड़ रुपये पांच संपत्तियां खरीदने में लगाए गए। इनमें सेक्टर-33सी में दो कनाल का मकान (करीब 23 करोड़ रुपये), सेक्टर-21सी में एक कनाल का मकान (करीब 10 करोड़ रुपये), सेक्टर-22 का एससीओ, मुल्लांपुर के अमारी हिल्स में फार्महाउस और ग्रेट पंजाब सोसाइटी का ए-306 प्लॉट शामिल हैं। दस्तावेजों के अनुसार सेक्टर-21सी के मकान के लिए 4.5 करोड़ रुपये नकद दिए गए। सेक्टर-22 के एससीओ के लिए बिल्डवेल सलूजा एलएलपी को करीब 12 करोड़ रुपये, फार्म हाउस के लिए 2.25 करोड़ और प्लॉट के लिए चार करोड़ रुपये देने का जिक्र है। प्लॉट के मामले में वाधवा के नाम शेयर प्रमाणपत्र भी जारी किया गया था।

37.82 करोड़ के लेनदेन में शेल कंपनियों की भूमिका

वाधवा से जुड़े 37.82 करोड़ रुपये के लेनदेन में 4.57 करोड़ रुपये नकद और 33.25 करोड़ रुपये शेल कंपनियों के जरिये बैंक हस्तांतरण के रूप में बताए गए हैं। स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स और कैपको फिनटेक से जुड़े लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं। चार्जशीट में रिभव ऋषि के बैंक खाते खुलवाने, रकम के हस्तांतरण में मदद करने और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 50 करोड़ रुपये की सीमा हटवाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभावित करने की कथित कोशिश का जिक्र है। रिकॉर्ड के अनुसार 6 जून 2024 से 31 जनवरी 2026 के बीच रिभव ऋषि और वाधवा के बीच 132 फोन कॉल हुईं।

सीसीटीवी, मोबाइल और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच
सीबीआई ने बुलियन कारोबारी दादासो चव्हाण, जगदीश पाटिल और मनोज भोसले के बयानों का भी उल्लेख किया है। इनमें हिसाब में दर्ज और हिसाब से बाहर नकदी लेनदेन की बात कही गई है। सवान ज्वेलर्स के मालिक राजन सिंह कटोडिया से 27 फरवरी 2026 को दो सीसीटीवी हार्ड डिस्क जब्त की गईं, जिन्हें 18 मार्च को केंद्रीय फॉरेंसिक प्रयोगशाला (सीएफएल), पंचकूला भेजा गया। उनके आईफोन-16 प्रो मैक्स और आईफोन-12 प्रो मैक्स भी जब्त कर 20 मार्च को सीएफएल में जमा कराए गए।
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कॉल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच



सीबीआई ने वोडाफोन आइडिया से मिले कॉल रिकॉर्ड और ग्राहक आवेदन फॉर्म के साथ संदिग्ध हस्तलिपि, हस्ताक्षर, मुहरों और फिक्स्ड डिपॉजिट की रसीदों को भी जांच में शामिल किया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19 के तहत आरोपियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी अभी लंबित बताई गई है। सोने का कथित फर्जी डेबिट से क्या संबंध है, यह जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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