पिछले दिनों जाट आरक्षण आंदोलन की आड़ में प्रदेश में किए गए उपद्रव में विदेशों से भी फंडिंग हुई जबकि यह खूनी खेल सीएम की कुर्सी हथियाने के लिए किया गया। जिसके पीछे इनेलो व कांग्रेस द्वारा रचा षड्यंत्र रहा तो इसमें अपने स्वार्थ के चलते कुछ भाजपा नेता भी शामिल हो सकते है।
सांसद राजकुमार सैनी ने अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत में यह संगीन आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र व प्रदेश सरकार सही दिशा में कार्य कर रही थी, लेकिन विपक्षी व जाट समुदाय के लोग प्रदेश सरकार को अस्थिर करना चाहते थे। यहां तक कि इनेलो व कांग्रेस ने जाट आंदोलन की आड़ में प्रदेश में ऐसे हालात पैदा करने चाहे, जिससे मध्यावधि चुनाव हो और सीएम की कुर्सी को हासिल किया जा सके।
बिल की कॉपी मिलने पर देंगे हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
सांसद सैनी ने कहा कि वह राज्य सरकार द्वारा पास किए गए जाट आरक्षण बिल की कॉपी लेने के लिए राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी से मिले थे, लेकिन उन्हें बताया गया कि अभी उन्होंने इस बिल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। जब भी राज्यपाल इस बिल पर हस्ताक्षर कर देंगे, उसकी कॉपी लेकर वह बिल को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
पहले ही भर देनी चाहिए थी जाटों से जेल
आरक्षण आंदोलन के दौरान जाट समाज के लोगों पर दर्ज मामले वापिस लिए जाने को लेकर समाज के लोगों द्वारा सरकार को दी गई जेल भरो आंदोलन की चेतावनी पर सांसद सैनी ने कहा कि इस समाज के लोगों से जेलें आंदोलन से पहले ही भर देनी चाहिए थी। अगर अब भी वह जेलों में जाना चाहते है तो देश भर में जेलें बहुत हैं।
सरकार को यह कार्य पहले ही कर देना चाहिए था और प्रदेश जलने से भी बच जाता। उन्होंने मुख्यमंत्री को पहले भी कहा था और अब फिर आगाह किया है कि वह इस समाज के दबाव में न आएं। जेल भरो आंदोलन की आड़ में इस समाज के लोग पहले की तरह नए हादसे की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे हालात में लोकतंत्र कैसे बच पाएगा।
मनरेगा से कम हो सकती है बेरोजगारी
सांसद सैनी ने कहा कि सरकार को मनरेगा का दायरा बढ़ाना चाहिए तथा इसके अंर्तगत पांच एकड़ से छोटे किसानों को भी शामिल करना चाहिए। इससे किसानों को इस योजना के तहत अपनी मजदूरी भी मिल पाएगी और उनका मोह खेती से भी नहीं हटेगा। ऐसा कर सरकार बेरोजगारी कम कर सकती है तो मनरेगा में किए जा रहे फर्जीवाड़े पर भी अंकुश लग पाएगा।