नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट-5 जारी कर दिया गया है। इसमें चंडीगढ़ ने स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा के विभिन्न पहलुओं में सुधार हुआ है, लेकिन बेटियों को लेकर स्थिति और दयनीय हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 में किए गए सर्वे में एक हजार बेटों पर बेटियों की संख्या महज 838 है, जबकि 2015-16 में हुए सर्वे में यह संख्या 981 दर्ज की गई थी। इससे साफ हो रहा है कि लिंग अनुपात को संतुलित करने के लिए किए जा रहे प्रयास महज खानापूर्ति साबित हो रहे हैं।
चौथे सर्वे के महज पांच साल बाद लिंगानुपात में 14 प्रतिशत की गिरावट होना चिंता का विषय है जबकि देश में पहली बार इसमें एक हजार बेटों पर 1020 बेटियों की संख्या दर्ज की गई है। पीयू के समाजशास्त्री प्रो. विनोद चौधरी का कहना है कि लिंगानुपात पर अब तक जितने भी शोध हुए हैं, उसमें यह बात सामने आई है कि गांव के बजाय शहरों में और निम्न वर्ग के बजाय उच्च वर्ग में ज्यादा हो रहा है। इसलिए उस तबके पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
अन्य क्षेत्र में बेहतर हुई स्थिति
| वर्ग |
एनएफएचएस 5 |
एनएफएचएस 4 |
6 साल के बाद स्कूल जाने वाली
लड़कियों की संख्या |
86.7 प्रतिशत |
83.7 प्रतिशत |
| इंटरनेट का प्रयोग करने वाली महिलाएं |
75.2 |
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| संस्थागत प्रसव |
96.9 प्रतिशत |
91.6 प्रतिशत |
| गर्भावस्था के दौरान चेकअप |
82.2 प्रतिशत |
67.4 प्रतिशत |
| एनीमिया का स्तर |
54.6 प्रतिशत |
73.1 प्रतिशत |
चंडीगढ़ की स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है। इसके साथ ही लोगों में सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ी है। लोग अपने रहन सहन और खानपान के साथ ही सेहत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीर हो गए हैं। नतीजन सुधार सामने आ रहा है। जहां तक लिंगानुपात कम होने की बात है तो इसके लिए पीएनडीटी कमेटी पूर्ण रूप से सक्रिय है।
-डॉ. सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य