फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब ठग पासवर्ड नहीं, भरोसा चुरा रहे: एमडी की फोटो से मैसेज भेज 1.96 करोड़ उड़ाने में तीन और दबोचे

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। साइबर ठगी का तरीका बदल रहा है। ठग अब बैंक खाते या ओटीपी हासिल करने के साथ-साथ लोगों के भरोसे को निशाना बना रहे हैं। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) की फोटो और नाम से व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर अकाउंट ऑफिसर से 1.96 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराने के मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तीन और आरोपियों अंकित कुमार, उज्ज्वल त्यागी और नितेश को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ठगी की रकम मंगवाने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराए, खाताधारक को साइबर ठगों से जोड़ा और रकम निकालकर आगे पहुंचाई। पुलिस अब 1.96 करोड़ रुपये की पूरी मनी ट्रेल खंगाल रही है।
विज्ञापन

मामले में पुलिस दिनेश भाटी उर्फ अरविंद चौधरी और कुलदीप उर्फ बंटू सिंह को 17 अगस्त को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम एक ही खाते में नहीं रखी गई, बल्कि अलग-अलग बैंक खातों के जरिये आगे बढ़ाई गई।
बॉस की फोटो देख अकाउंट ऑफिसर ने मान लिया मैसेज असली है
पुलिस के मुताबिक, चंडीगढ़ के शिवालिक एन्क्लेव निवासी शिकायतकर्ता की कंपनी के अकाउंट ऑफिसर को वाट्सऐप पर मैसेज आया। इसमें कंपनी के एमडी का नाम और प्रोफाइल फोटो लगी थी। अकाउंट ऑफिसर को लगा कि निर्देश सीधे एमडी की ओर से आया है। इसके बाद उसे एक बैंक खाते की जानकारी देकर 1.96 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया। विश्वास में आकर कंपनी के खाते से रकम बताए गए खाते में भेज दी गई।
विज्ञापन

3.50 लाख रुपये अंकित के खाते में आए
पुलिस के अनुसार, अंकित कुमार ने अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था। उज्ज्वल त्यागी और नितेश के माध्यम से यह खाता साइबर ठगों तक पहुंचा। इस खाते में ठगी की रकम में से 3.50 लाख रुपये आए। आरोप है कि अंकित ने चेक के जरिये रकम निकाल ली और कमीशन लेकर उसे ठगों तक पहुंचा दिया। पुलिस खाते से जुड़े दूसरे लेनदेन की भी जांच कर रही है। उज्ज्वल पर नितेश के माध्यम से अंकित का खाता ठगों को उपलब्ध कराने का आरोप है।

मोबाइल से मिलीं व्हाट्सएप चैट, नेटवर्क की तलाश
पुलिस ने उज्ज्वल और नितेश के मोबाइल फोन की जांच की है। इनमें व्हाट्सएप चैट समेत अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। पुलिस इनकी जांच कर ठगी के नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर रही है। मामला 17 अप्रैल 2026 को साइबर क्राइम थाना चंडीगढ़ में दर्ज हुआ था।
फोटो, नाम और पद देखकर न करें भरोसा
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से अचानक रकम ट्रांसफर करने का संदेश आए तो केवल प्रोफाइल फोटो देखकर उसे असली न मानें। उसी व्यक्ति को फोन कर या कंपनी में पहले से तय किसी दूसरे संपर्क माध्यम से निर्देश की पुष्टि करें। खासकर बड़ी रकम के मामले में दो स्तर पर सत्यापन जरूरी है। जल्दबाजी और पद के दबाव में लिया गया फैसला ठगों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकता है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें