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गाड़ी के लिए नंबर खरीदने में होने लगा है 'खेल', 0001 और 0009 के कनेक्शन से हिला आरएलए

Sat, 28 Dec 2019 02:15 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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फैंसी नंबर खरीदने के लिए अब बोलीदाता ‘खेल’ करने लगे हैं। रजिस्ट्रिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) ने एक ऐसी ही बड़ी गड़बड़ी की आशंका जताई है। 22 सितंबर को हुए ई-ऑक्शन में सीएच 01 बीवाई 0001 महज एक लाख में बिका, जबकि 0009 करीब 16.03 लाख में बिका।
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16 लाख की बोली लगाने वाला नंबर लेने ही नहीं पहुंचा। अब आरएलए ने 0001 और 0009 दोनों ही नंबरों की अलॉटमेंट को रद्द कर दिया है। आरएलए के अधिकारियों ने संदेह जताया है कि कोई व्यक्ति चाल चलकर सरकार को लाखों का नुकसान करने की कोशिश कर रहा है।

आशंका जताई जा रही है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझ कर दो नंबरों पर सबसे ज्यादा बोली लगाई है। ई-ऑक्शन में सीएच 01 बीवाई 0009 नंबर के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई गई, जबकि 0001 नंबर के लिए सबसे कम बोली दर्ज की गई। 0009 नंबर 16 लाख 3 हजार रुपये में बिका। यह नंबर दिली बहादुर बसनेत ने खरीदा, लेकिन ऑक्शन के तीन महीने बाद भी कोई यह नंबर लेने नहीं पहुंचा, न ही पैसे जमा कराया।
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वहीं, 0001 को लेने के लिए व्यक्ति पहुंचा तो आरएलए को गड़बड़ी का आभास हुआ। इस बारे में साइबर सेल को शिकायत दी गई। जांच की गई तो पता चला कि 0009 खरीदने वाला एक चपरासी है, जिसके पास सिर्फ 50 हजार की एक मोटरसाइकिल है। पुलिस ने पूछताछ की तो बताया कि उसने तो कोई बोली लगाई ही नहीं। इसके बाद ही आरएलए ने तुरंत 0001 की अलॉटमेंट को रद्द कर दिया। आरएलए ने रद्द करने के कारण भी बताए।

कहा कि, उन्हें संदेह है कि 0001 और 0009 के बीच कोई कनेक्शन है। कोई जानबूझ कर सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाना चाहता है और किसी साजिश के तहत ही 0001 का दाम एक लाख रुपये किया गया है। 0001 की बोली लगाने वाला व्यक्ति हाईकोर्ट भी गया लेकिन कोर्ट ने पहले उसे सेक्रेटरी के पास अपील करने को कहा।
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अब समझिए कि हुआ क्या है...

सितंबर महीने में हुई ऑक्शन में 0001 के लिए पहले ही दिन 15 लाख की बोली लगाई गई और एक अन्य व्यक्ति ने इसी नंबर के लिए एक लाख की बोली लगाई। जिस व्यक्ति ने 0001 के लिए 15 लाख की बोली लगाई थी उसी व्यक्ति ने 0009 नंबर के लिए 16 लाख की बोली लगा दी। नियमों के तहत उसे 0001 नंबर को छोड़ना पड़ा क्योंकि उसकी हाईएस्ट बोली 0009 नंबर के लिए थी।

ऐसे में अब एक लाख रुपये की बोली लगाने वाले व्यक्ति को 0001 नंबर अलॉट हो गया, लेकिन बाद में 0009 नंबर के लिए 16 लाख की बोली लगाने वाला व्यक्ति पैसे जमा कराने पहुंचा ही नहीं। इसलिए आरएलए को 0001 और 0009 के बीच के कनेक्शन को लेकर शक हुआ। दोनों की अलॉटमेंट को रद्द करने के बाद जांच साइबर सेल को सौंपी गई है।

साइबर सेल की रिपोर्ट के बाद ही आरएलए मामले में आगे की कार्रवाई करेगा।
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